मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
कोई पास आया सवेरे सवेरे मुझे आज़माया सवेरे सवेरे मेरी दास्ताँ को ज़रा सा बदल कर मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे जो कहता था कल शब सँभलना सँभलना वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे
Moreहर सदफ़ में गुहर हो जरूरी है क्या हर फ़ुगाँ में असर हो जरूरी है क्या वो जैसा मिला हमने क़बूल कर लिया हर बश़र में मलक हो जरूरी है क्या आस्तीनों में
Moreनदी के दोनों पाट लहरते हैं आग की लपटों में दो दिवालिए सूदखोरों का सीना जैसे फुँक रहा हो शाम हुई कि रंग धूप तापने लगे अपनी यादों की और नींद में
Moreसाधारण डाक से भेजी गईं वे पत्रिकाएँ जो कभी नहीं मिल पाती उसे पढ़ने के लिए कौन रख लेता होगा एक बार मेरा एक चेक डाल दिया गया था साधारण डाक में
Moreकितने सीमित हो गये हैं विकल्प कि बेदाग़ की जगह चुने जा रहे हैं कम दाग़दार जन को साधने के लिये साधी जा रही है जात साधा जा रहा है ईश्वर खोजकर
Moreवह पूर्ण थी उसके मृत शरीर ने ओढ़ रखी है मुस्कान उपलब्धि की उसके पहने गए चोगे के सिलवटों में यूनानी होने का भ्रम झाँकता है उसके नंगे पैर यह कहते लग
Moreबाकी चीज़ों के अलावा शुक्रिया, यह बताने के लिए कि कैसे पुराने वृक्षों की उदार मृत्यु लाल बारूद बन पूरे जंगल में बिछ जाती है । [ अनुवाद – सत्यम सोलंकी ]
Moreस्त्रियाँ घर लौटती हैं पश्चिम के आकाश में उड़ती हुई आकुल वेग से काली चिड़ियों की पांत की तरह स्त्रियों का घर लौटना पुरुषों का घर लौटना नहीं है पुरुष लौटते हैं
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