हर सदफ़ में गुहर हो ज़रूरी है क्या

1 min read
रोमेश चतुर्वेदी

हर सदफ़ में गुहर हो जरूरी है क्या
हर फ़ुगाँ में असर हो जरूरी है क्या

वो जैसा मिला हमने क़बूल कर लिया
हर बश़र में मलक हो जरूरी है क्या

आस्तीनों में हैं पर क्या अपने नहीं हैं
हर मारगुर्जः में ज़हर हो जरूरी है क्या

अलग बात है अब वो क़ुर्बत नहीं है
कोई दिल बदर हो जरूरी है क्या

चश्मे सियाह दोनों पर ए इश्क सुन
दुनिया से ग़फ़ल हो जरूरी है क्या

पाँव रखो, इतना भी क्या डर रहे हो
जुनूँन में फ़रह हो जरूरी है क्या

[ 1. सदफ़ – सीप 2. गुहर -मोती 3. फुंग़ा – फ़रियाद 4. बश़र – आदमी 5. मलक – फ़रिश्ता 6. मारगुर्जः – फन वाला सांप 7. चश्मे सियाह – प्रेमिका के लिए प्रयोग हो तो सुंदर आँखें और अपने लिए प्रयोग हो तो अंधी आँखें 8. ग़फ़ल – बेख़बरी 9. फ़रह – आनंद , खुशी ]

रोमेश चतुर्वेदी
+ posts

रोमेश चतुर्वेदी पेशे से पत्रकार व कवि हैं। आपकी रचनाएँ ही आपकी पहचान हैं। आपसे romeshchaturvedi17@gmail.com पे बात की जा सकती है।

रोमेश चतुर्वेदी पेशे से पत्रकार व कवि हैं। आपकी रचनाएँ ही आपकी पहचान हैं। आपसे romeshchaturvedi17@gmail.com पे बात की जा सकती है।

फूल झरे

फूल झरे जोगिन के द्वार हरी-हरी अँजुरी में भर-भर के प्रीत नई रात करे चाँद की

पाप

पाप करना पाप नहीं पाप की बात करना पाप है पाप करने वाले नहीं डरते पाप

तुमने छोड़ा शहर

तुम ने छोड़ा शहर धूप दुबली हुई पीलिया हो गया है अमलतास को बीच में जो