सुधियों में गुंजारित किसी मंत्र सरीखा तुम्हारा विह्वल स्वर मेरी आत्मा की साँकलें बजाता है निरंतर सुनो! मेरी देह की एकांतिक भूमि पर चाहो तो रख सकते हो हाथ तुम आत्मा के
Moreखेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े सीढ़ियाँ आती रहें साँप का ख़ाना न पड़े देख मे’मार परिंदे भी रहें घर भी बने नक़्शा ऐसा हो कोई पेड़ गिराना न
Moreगरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला चिड़ियों को दाने बच्चों को गुड़-धानी दे मौला दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी
Moreमैं तुम लोगों से इतना दूर हूँ तुम्हारी प्रेरणाओं से मेरी प्रेरणा इतनी भिन्न है कि जो तुम्हारे लिए विष है, मेरे लिए अन्न है। मेरी असंग स्थिति में चलता-फिरता साथ है,
Moreजो नहीं हुआ दुःख उसका नहीं जो हुआ उसका दुःख है उसका दुःख घेरे है जो हो रहा है उसके बाहर घेरे है बहुत बड़ी दुनिया में एक छोटा-सा कंकड़ हिलकर रह जाता
Moreतुम्हें पेड़ से हवा नहीं लकड़ी चाहिए नदी से पानी नहीं रेत चाहिए धरती से अन्न नहीं महँगा पत्थर चाहिए पक्षी मछली और साँप को भूनकर घोंसले, सीपी और बांबी पर तुम
Moreसबसे ग़रीब आदमी की सबसे कठिन बीमारी के लिए सबसे बड़ा विशेषज्ञ डॉक्टर आए जिसकी सबसे ज़्यादा फ़ीस हो सबसे बड़ा विशेषज्ञ डॉक्टर उस ग़रीब की झोंपड़ी में आकर झाड़ू लगा दे
Moreकौन है ये गुल मकई? डरती नहीं जो बंदूक़ों से डटी रहती बेख़ौफ़ उनकी धमकियों के सामने ढहा दिए सैकड़ों मदरसे जिन्होंने उजाड़ दी स्वात घाटी तबाह कर दी बेपनाह ख़ूबसूरती और
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