प्यार मेरे

सुधियों में गुंजारित किसी मंत्र सरीखा तुम्हारा विह्वल स्वर मेरी आत्मा की साँकलें बजाता है निरंतर सुनो! मेरी देह की एकांतिक भूमि पर चाहो तो रख सकते हो हाथ तुम आत्मा के

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गरज बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला

गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला चिड़ियों को दाने बच्चों को गुड़-धानी दे मौला दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी

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सारा दिन

तुम्हारी आँखें कुछ बोलती रहीं आज सारा दिन सूरज मेरे कंधे पर सवार रहा आज सारा दिन खूँटी से टँगे कोट में सारी रात चाय की एक चुस्की ठिठुरती रही दीवार पर

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मैं तुम लोगों से दूर हूँ

मैं तुम लोगों से इतना दूर हूँ तुम्हारी प्रेरणाओं से मेरी प्रेरणा इतनी भिन्न है कि जो तुम्हारे लिए विष है, मेरे लिए अन्न है। मेरी असंग स्थिति में चलता-फिरता साथ है,

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क्या पता किस बात का दुःख रहा

जो नहीं हुआ दुःख उसका नहीं जो हुआ उसका दुःख है उसका दुःख घेरे है जो हो रहा है उसके बाहर घेरे है बहुत बड़ी दुनिया में एक छोटा-सा कंकड़ हिलकर रह जाता

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अकथ कथा

ये वो क़िस्सा है जिसमें घुस के रात सोती है ये वो क़िस्सा है जिसमें दिन के छाँव मिलती है ये वो क़िस्सा है जिसमें हमको तुमको मिलना था ये वो क़िस्सा

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अश्वमेधी घोड़ा

तुम्हें पेड़ से हवा नहीं लकड़ी चाहिए नदी से पानी नहीं रेत चाहिए धरती से अन्न नहीं महँगा पत्थर चाहिए पक्षी मछली और साँप को भूनकर घोंसले, सीपी और बांबी पर तुम

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सबसे ग़रीब आदमी की

सबसे ग़रीब आदमी की सबसे कठिन बीमारी के लिए सबसे बड़ा विशेषज्ञ डॉक्टर आए जिसकी सबसे ज़्यादा फ़ीस हो सबसे बड़ा विशेषज्ञ डॉक्टर उस ग़रीब की झोंपड़ी में आकर झाड़ू लगा दे

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गुल मकई!! गुल मकई!! गुल मकई!!

कौन है ये गुल मकई? डरती नहीं जो बंदूक़ों से डटी रहती बेख़ौफ़ उनकी धमकियों के सामने ढहा दिए सैकड़ों मदरसे जिन्होंने उजाड़ दी स्वात घाटी तबाह कर दी बेपनाह ख़ूबसूरती और

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