मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
हम जिएँ न जिएँ दोस्त तुम जियो एक नौजवान की तरह, खेत में झूम रहे धान की तरह, मौत को मार रहे बान की तरह। हम जिएँ न जिएँ दोस्त तुम जियो
Moreमूरख है कालीघाट का पंडित सोचता है मंत्रोचार से और लाल पुष्पों से ढक लेगा पाप नहीं फलेगा कुल गोत्र के बहाने कृशकाय देह का दुःख मूरख है ममता बंदोपाध्याय का रसोइया
Moreएक व्यक्ति के क़त्ल के बाद माँ रोती है पूरा अस्तित्व रोता है साथ में आदम और हव्वा रोते हैं अपने नस्लों के हश्र पर इन सबमें शामिल हैं ईश्वर के आंसू
Moreयदि वेदों में लिखा होता ब्रह्म के पैर से हुए हैं पैदा। उन्हें उपनयन का अधिकार नहीं। तब, तुम्हारी निष्ठा क्या होती? यदि धर्मसूत्रों में लिखा होता तुम ब्राह्मणों, ठाकुरों और वैश्यों
Moreतुमने कहा— ब्रह्मा के पाँव से जन्मे शूद्र और सिर से ब्राह्मण उन्होंने पलट कर नहीं पूछा— ब्रह्मा कहाँ से जन्मा? तुमने कहा— सेवा ही धर्म है शूद्र का उन्होंने नहीं पूछा—
Moreतीन आदमियों के आगे भोजन की थाली है चौथे के आगे थाली ख़ाली है तीन आदमियों के बदन पर रेशमी परिधान है चौथे का बदन उघड़ा है तीन आदमियों के बिस्तर बंगलों
Moreजवान होते बेटों ! इतना झुकना इतना कि समतल भी ख़ुद को तुमसे ऊँचा समझे कि चींटी भी तुम्हारे पेट के नीचे से निकल जाए लेकिन झुकने का कटोरा लेकर मत खड़े
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