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ज़ुबैर सैफ़ी की नज़्में

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कविताएँ : ज़ुबैर आलम

1.  झाझ और प्रेमिका

मन के भीतर आती गयी तुम,
जैसे आता है गोंद पेड़ों पर,
प्रेम भर जाये तो बरस पड़ता है,
शरीर के तनों पर!

तुम आयी!
आकाश सकुचाया,
धरती पर भटकटैया के कांटे उगे,
आक के फूलों की बुढ़िया दौड़ी,
नदी में उस बरस मछलियाँ आयीं
जिस बरस आयी तुम!

तुम आयी!
धान के खेतों में गीत गाती लड़कियाँ आयी,
पटसन के खेतों में ख़ूब सन आया,
सूरजमुखी खिलते रहे,
हरट और कुएँ नहीं सूखे,
तुम आती रही,
ईंखों में रस भरता रहा,
गुड़ के कढ़ाव चलते रहे,
उस बरस सूखा भी नहीं पड़ा!

तुम गयी
गाँव के पास हवाई अड्डे का ऐलान हुआ,
हवाई जहाज़ तुमने कभी नहीं देखे थे,
वो गाँव के एकदम पास आने वाले थे,
तुम गयी,
गाँव ‘हवैई झाझ’ में चला गया,
कुएँ सूख गए,
ईंखें जल गयीं,
लड़कियाँ एडले और ब्रिटनी गाने लगीं,
गीत तुम ले गयी,
पपैयों के गीत!

आना और जाना,
टंगे घड़ों से पत्थर मार कर रस रिसना,
तुम रिस गई,
तुम रिस गयी,
मैं रिस गया,
कुछ भी नहीं बचा!

2. 1968 : लव स्टोरी ऑफ ए ग्रेंडफ़ादर

तुम आती थी तो समय
नवजात शिशु की भांति
उनींदने लगता था,
गुड़हल पर ढेरों फूल लदते,
उस बरस आम का बौर गये बरस से दोगुना आता,
तुम्हारा इक्का फाटक पर रूकता तो,
घोड़ा हिनहिनाता,
पशु जानते थे तुम्हारे और मेरे बीच का संबंध,
इक्के से तुम प्रकट होती,
बाप का नाम लिखा संदूक लेकर –

“सख़ावत हुसैन
1223447
रेलवे यार्ड जबलपुर”

तुम्हारे तेल चुआते बालों की आभा से मन चमक उठता,
तुम मुस्काती,
और सब ठीक हो जाता,
जैसे मस्जिद-मंदिर का कोई झगड़ा हुआ ही ना हो,
कहीं कोई नीच जात ठाकुरों ने पानी पीने के चलते ना पीटा हो,
सब सही लगता,
छुट्टियाँ सरपट दौड़ती,
इक्का‌ फिर फाटक पर होता,
फाटक तुम्हारे जाने के शोक में चूं कर के रोता,
संकेत विरह के निर्जीव भी जानते हैं,
घोड़े की आंखों में ठिठुरता हुआ सावन होता,
इक्का जाता,
तुम हाथ हिलाती,
मैं पीछे दौड़ता दूर दूर तक,
परसपुर के मोड़ तक फेफड़ों में आँसू भर जाते,
दौड़ा नहीं जाता,
तुम चली जाती,
ये हर बरस होता,
अब जब बालों में सफेदी आ चुकी है,
तो अब भी फेफड़ों में आँसू भर जाते हैं,
तुम्हारी स्मृति में दौड़ नहीं पाता,
कितने क्षण बीत गये हैं,
सांस‌ भी लेना भूल गया हूँ,
इक्के चलने बंद हो गये,
प्रेम कपाट भी..
अब छुट्टियों में तुम नहीं आती,
कभी कभी नाती-नातिन आ जाते हैं,
मैं बरामदे की कुर्सी पर बैठा,
तुम्हारी एकमात्र धुंधली तस्वीर पर,
अंगुली रखता हूँ तो,
बच्चे हँस देते हैं,
बच्चे कितने बच्चे हैं,
बचपन का प्रेम क्या जानेंगे!

3. जान तुम चाँद हो

गई शब तेरा फूल चेहरा,
मेरे खुरदुरे हाथों में था,
मैंने अपने दिल में ना जाने कौन कौन सी दुआएं पढ़ी,
इस्म फूंके,
कि तेरे चेहरे पर ख़ुशी के आँसू भी ना आ पाये,
नहीं जानता था कि,
तेरे बदन की दिलफ़रेब महक,
वो सारे इस्म बेमानी कर देगी,
सारी दुआएं रद हो जायेंगी,
कोई दुआ, कोई इस्म काम ना आ सकेगा,
तू मेरे कांधे से लग कर सिसक उठेगी,
जैसे ज्वार भाटे के आगोश में सिमटे तो,
लहर बोलती है!

मैं शब भर हाथों में मसनूई चाँद थामे,
तेरे तसव्वुर के दश्त में घूमते दरवेश की,
फटी बिवाईयों पर मेंहदी लगाता रहा,
हिना का रंग आंखों में उतरता गया,
तेरा चेहरा मसनूई चाँद की जगह ना ले सका!

तुझसे पूरे सत्तर किलोमीटर की दूरी पर,
अपने घर में पड़ा मैं,
चाँद के ख़्वाब देखता हूँ,
सोचता हूँ,
तेरा चाँद चेहरा,
इस मज़दूर के रेत हाथों में कब आ सकेगा,
कब मेरी अंगुलियाँ तेरे होंठों का इत्र छू सकेंगी,
कब मेरे सीने पर उगी राख के नीले दरख़्त,
तेरी जुल्फों की छुअन से सब्ज़ हो सकेंगे?
ऐ रूपज़ादी!
तुझे कुछ ख़बर नहीं है,
लोग कहते हैं,
मेरे कमरे में दो चाँद हैं,
एक तेरा चेहरा, मेरे चेहरे पर उतरा हुआ,
दूजा मसनूई!

4. दशावतार

ईश्वर के चेहरे पर,
अवश्य ही काली रेखाएं होंगी,
वर्ना कोयला तोड़ते मज़दूरों के हाथ
सफ़ेद होते।
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कमर कमान‌ होती,
तो आत्मा के तीर इस कमान से,
ईश्वर के सीने में जा धंसते।
__________

ईश्वर जब से है,
तब से भूखा है,
भूख लगने पर संसार से इंसान उठा लेता है,
ईश्वर द्वारा किया गया अपहरण ‘मृत्यु’ है।
___________

ईश्वर नाच रहा था,
नाच कर थका तो,
कुछ देर सर घूमता रहा,
ऐसे ही चक्रवात रचे गये,
ईश्वर जब तब नाचता है,
धरती पर चक्रवात आते रहते हैं।
_________

ईश्वर की अनुपस्थिति में,
संसार उसकी प्रेमिका ने चलाया,
उस वर्ष मरने वालों का औसत आंकड़ा
अनगिनत प्रतिदिन था।

_________

ईश्वर छोटा बच्चा भी हो सकता है,
छोटे बच्चों में सही
निर्णय लेने की क्षमता देर से आती है।
_________

ईश्वर वीडियो गेम खेलता होगा,
और वो उसका लती होगा
विज्ञान कहता है
वीडियो गेम खेलते समय
आप सबसे तेज़ निर्णय लेते हैं,
किसी अपने की अकस्मात मृत्यु लगभग,
ईश्वर द्वारा वीडियो गेम खेलते समय लिया गया निर्णय है।
____________

ईश्वर को सेब प्रिय था,
प्रिय वस्तु किसी को नहीं दी जा सकती,
भले ही वो एडम हो!
__________

ईश्वर के पुस्तकालय में
सिर्फ़ कोरी किताबें होंगी,
क्योंकि भाषा और लिपि का आविष्कार
मानवों ने किया।

_____

ईश्वर अपने बाप से छिप कर
सिगरेट पीता होगा,
इतना कुहासा कहां से आया?

5. चिट्ठी रसाँ

कोई सहाफ़ी,
कोई चिट्ठी रसाँ,
ये बतलाये कि उन शीरख़्वार बच्चों की क़िस्मत का क्या हुआ?
जिनको उनकी मांओं ने दूध पिलाने से इंकार कर दिया।

कोई क़ासिद ख़त लाये
जिसमें लिखा हो
बाप की अज़मत बेटों की छाती की कील नहीं होती।

उन आवारा फिरते लड़कों के नसीब में क्या है?
जो बेरोज़गारी की ज़ंजीर से जकड़े हुए,
अपने ही घर जाने से डरते हैं।

उन रेलों को कब लौट के आना नसीब होगा ?
जिन रेलों में अपनों के आँसू सीट प बैठे बैठे सरहद पार हुए।

उन लड़कियों के हाथों पर मेंहदी की ख़ुशबू कब पांव पसारेगी,
कि जिनके बालों में चांदी उगने लगी है।

कौन ये ख़बर लायेगा कि खुदकुशी हराम है
हर उस शख़्स पर जो भूखा ना हो।

मगर अब कोई ख़बर क्यूँ आये
कि
ख़ुदा के चिट्ठी रसाँ,
हज़रत ए जिब्रील खां!
गुज़रे बरस के दंगों में,
मुसलमान होने के चलते मारे जा चुके हैं!

ज़ुबैर सैफ़ी

ज़ुबैर सैफ़ी (जन्म - 2 मार्च 1993) बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश से हैं. इन दिनों आप नया सवेरा वेब पोर्टल में सह संपादक के रूप में कार्यरत हैं. आपसे designerzubair03@gmail.com पे बात की जा सकती है.

ज़ुबैर सैफ़ी (जन्म - 2 मार्च 1993) बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश से हैं. इन दिनों आप नया सवेरा वेब पोर्टल में सह संपादक के रूप में कार्यरत हैं. आपसे designerzubair03@gmail.com पे बात की जा सकती है.

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