उदास लड़के

उदास लड़कों को फूल नहीं भेजे जाते उन्हें कॉफी पर भी नहीं बुलाया जाता उदास लड़के रोते भी नहीं उनकी प्रेमिकाएँ भी शायद ही होतीं। उदास लड़के अक्सर कर्मठ या निठल्ले हो जाते हैं थकन

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कोई पास आया सवेरे सवेरे

कोई पास आया सवेरे सवेरे मुझे आज़माया सवेरे सवेरे मेरी दास्ताँ को ज़रा सा बदल कर मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे जो कहता था कल शब सँभलना सँभलना वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे

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बंदिनी

डा. कंचन का फोन आया था, “आज हमारे कारावास में कान्हा ने जन्म लिया है, सुमि।’’ उस समय मैं अपने घर में जन्माष्टमी की झाँकी सजा रही थी। डा. कंचन इस शहर

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नदी के दोनों पाट

नदी के दोनों पाट लहरते हैं आग की लपटों में दो दिवालिए सूदखोरों का सीना जैसे फुँक रहा हो शाम हुई कि रंग धूप तापने लगे अपनी यादों की और नींद में

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साधारण डाक

साधारण डाक से भेजी गईं वे पत्रिकाएँ जो कभी नहीं मिल पाती उसे पढ़ने के लिए कौन रख लेता होगा एक बार मेरा एक चेक डाल दिया गया था साधारण डाक में

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खिड़कियाँ

खिड़कियों को दरवाज़ों से ज़्यादा सुंदर होना चाहिए दरवाज़ों से मुझे एक भय रहता है कभी तुम निकलो और न लौट सको फिर कभी मेरी तरफ़ इसलिए, मैं इन खिड़कियों को सजाता

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कगार

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वह पूर्ण थी उसके मृत शरीर ने ओढ़ रखी है मुस्कान उपलब्धि की उसके पहने गए चोगे के सिलवटों में यूनानी होने का भ्रम झाँकता है उसके नंगे पैर यह कहते लग

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