मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
जा रहा हूँ मैं बुद्ध इस दलहीन बौद्ध मठ से जा रहा हूँ आनंद या दुःख में पता नहीं चला जा रहा हूँ मैं चला जा रहा हूँ मुंबई, दिल्ली और कलकत्ते
Moreनहीं हूँ किसी का भी प्रिय कवि मैं ज़रा देर से ही सही मुझे यह ज्ञात हुआ आज मैं कृतज्ञ हूँ जाने-अनजाने हर किसी का और यह हर किसी का व्यूह मुझे
Moreजो जितने ज़्यादा लोगों का जितना ज़्यादा नुक़सान कर सके वो उतना ही बड़ा है। छोटा वो है जो किसी का नुक़सान न कर सके। उस हर बात में राजनीति है जहाँ
Moreइस सरपट भागती दुनिया में कुछ भी पा लेना मुश्किल है अब मुश्किल है ये कहना कि हद के पार और सरहद के पार में मनुष्यता का ज़्यादा नाश कहाँ है, पुनर्जागरण को पहुँचने में
Moreतुम नहीं थे एक ख़ालीपन था गहरे पग-चिह्न लिए दूर तक रेत थी और कुछ भी नहीं था जहाँ मैं थी वहाँ मैं नहीं थी बची हुई नमी लिए लुप्त होती एक
Moreअँधेरा बढ़ रहा त्रासद अंधेरा है यह और हम प्रतीक्षारत रोशनी में डूब कर पढ़े जाने के लिए प्रस्तुत प्रतीक्षा को पढ़ने के लिए चाहिए एक जीवन का सन्नाटा सन्नाटे को साधने
Moreएक जवान होती लड़की केवल देह होती है सावन चढ़े आकाश के नीचे पूरा भूगोल होती है एक उमड़ी-सी नदी – डगमगाती नाव को भरमाती भँवर होती है दूरागत लोक धुनि की
Moreजिंदगी का अर्थ मरना हो गया है और जीने के लिये हैं दिन बहुत सारे। इस समय की मेज़ पर रक्खी हुई जिंदगी है ‘पिन-कुशन’ जैसी दोस्ती का अर्थ चुभना हो गया
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