देखिए ना मेरी कारगुज़ारी / अज्ञेय

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देखिए ना मेरी कारगुज़ारी / अज्ञेय

अब देखिए न मेरी कारगुज़ारी

कि मैं मँगनी के घोड़े पर
सवारी कर
ठाकुर साहब के लिए उन की रियाया से लगान
और सेठ साहब के लिए पंसार-हट्टे की हर दूकान
से किराया
वसूल कर लाया हूँ

थैली वाले को थैली
तोड़े वाले को तोड़ा
और घोड़े वाले को घोड़ा।

सब को सब का लौटा दिया
अब मेरे पास यह घमंड है
कि सारा समाज मेरा एहसानमंद है

अज्ञेय
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सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन ‘अज्ञेय’ (07/03/1911 – 04/04/1987) को कवि, शैलीकार, कथा-साहित्य को एक महत्वपूर्ण मोड़ देने वाले कथाकार, ललित निबंधकार, संपादक और अध्यापक के रूप में जाना जाता है. आप ‘प्रयोगवाद’ एवं ‘नयी कविता’ को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने वाले कवि हैं. आपको 1964 में साहित्य अकादमी और 1978 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन ‘अज्ञेय’ (07/03/1911 – 04/04/1987) को कवि, शैलीकार, कथा-साहित्य को एक महत्वपूर्ण मोड़ देने वाले कथाकार, ललित निबंधकार, संपादक और अध्यापक के रूप में जाना जाता है. आप ‘प्रयोगवाद’ एवं ‘नयी कविता’ को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने वाले कवि हैं. आपको 1964 में साहित्य अकादमी और 1978 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

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