जवान होते बेटों ! इतना झुकना इतना कि समतल भी ख़ुद को तुमसे ऊँचा समझे कि चींटी भी तुम्हारे पेट के नीचे से निकल जाए लेकिन झुकने का कटोरा लेकर मत खड़े
More१) घाव वह जगह है जहाँ से प्रकाश आप में प्रवेश करता है। २) मौन ईश्वर की भाषा है बाकी सब घटिया अनुवाद है। ३) एक पूरे दिल को घर ले जाने
Moreजा रहा हूँ मैं बुद्ध इस दलहीन बौद्ध मठ से जा रहा हूँ आनंद या दुःख में पता नहीं चला जा रहा हूँ मैं चला जा रहा हूँ मुंबई, दिल्ली और कलकत्ते
Moreनहीं हूँ किसी का भी प्रिय कवि मैं ज़रा देर से ही सही मुझे यह ज्ञात हुआ आज मैं कृतज्ञ हूँ जाने-अनजाने हर किसी का और यह हर किसी का व्यूह मुझे
Moreजो जितने ज़्यादा लोगों का जितना ज़्यादा नुक़सान कर सके वो उतना ही बड़ा है। छोटा वो है जो किसी का नुक़सान न कर सके। उस हर बात में राजनीति है जहाँ
Moreतुम अकेली नहीं हो सहेली जिसे अपने वीरान घर को सजाना था और एक शायर के लफ़्ज़ों को सच मानकर उसकी पूजा में दिन काटने थे तुमसे पहले भी ऐसा ही इक
Moreइस सरपट भागती दुनिया में कुछ भी पा लेना मुश्किल है अब मुश्किल है ये कहना कि हद के पार और सरहद के पार में मनुष्यता का ज़्यादा नाश कहाँ है, पुनर्जागरण को पहुँचने में
Moreएक लड़की, उदास लड़की, बला की उदास लड़की! .. जिसके नाज़ुक होंटों से गिर पड़ती है कोई रूमानी नज़्म, बोलते हुए, एक नज़्म , रूमानी नज़्म, बला की रूमानी नज़्म! … जिसकी
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