जवान होते बेटों 

जवान होते बेटों ! इतना झुकना इतना कि समतल भी ख़ुद को तुमसे ऊँचा समझे कि चींटी भी तुम्हारे पेट के नीचे से निकल जाए लेकिन झुकने का कटोरा लेकर मत खड़े

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डिबेट

मुझे डर लगता है कि किसी दिन वे मुझे डेथ सर्टिफिकेट थमा देंगें। आप जो हैं वह आप नहीं हैं, कहकर वो मुझे अख़बारों में मुखाग्नि न दे दें। कहीं किसी न्यूज़

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अजायबघर

पृथ्वी कितनी छोटी थी जब हमारे पास मिलने की आकांक्षा थी। आकांक्षाएं  सिमटती रहीं और एक दिन बहुत दूर हो गए हमसे हमारे ही शहर। एक तरह का अजनबीपन बस गया है

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उद्धरण: रूमी

१) घाव वह जगह है जहाँ से प्रकाश आप में प्रवेश करता है। २) मौन ईश्वर की भाषा है बाकी सब घटिया अनुवाद है। ३) एक पूरे दिल को घर ले जाने

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आख़िरी कविता

जा रहा हूँ मैं बुद्ध इस दलहीन बौद्ध मठ से जा रहा हूँ आनंद या दुःख में पता नहीं चला जा रहा हूँ मैं चला जा रहा हूँ मुंबई, दिल्ली और कलकत्ते

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मैं कृतज्ञ हूँ

नहीं हूँ किसी का भी प्रिय कवि मैं ज़रा देर से ही सही मुझे यह ज्ञात हुआ आज मैं कृतज्ञ हूँ जाने-अनजाने हर किसी का और यह हर किसी का व्यूह मुझे

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कुछ परिभाषाएं

जो जितने ज़्यादा लोगों का जितना ज़्यादा नुक़सान कर सके वो उतना ही बड़ा है। छोटा वो है जो किसी का नुक़सान न कर सके। उस हर बात में राजनीति है जहाँ

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एक सहेली की नसीहत

तुम अकेली नहीं हो सहेली जिसे अपने वीरान घर को सजाना था और एक शायर के लफ़्ज़ों को सच मानकर उसकी पूजा में दिन काटने थे तुमसे पहले भी ऐसा ही इक

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अज्ञेय की खोज में

इस सरपट भागती दुनिया में कुछ भी पा लेना मुश्किल है अब मुश्किल है ये कहना कि हद के पार और सरहद के पार में मनुष्यता का ज़्यादा नाश कहाँ है, पुनर्जागरण को पहुँचने में

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बर्गे गुल के नाम

एक लड़की, उदास लड़की, बला की उदास लड़की! .. जिसके नाज़ुक होंटों से गिर पड़ती है कोई रूमानी नज़्म, बोलते हुए, एक नज़्म , रूमानी नज़्म, बला की रूमानी नज़्म! … जिसकी

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