मेरे काम की नहीं

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बहुत उम्मीद थी
कि
लौटते ही ढेर सारे
बंद लिफाफे
गेट पर लगे
बक्से में बेतरतीब पड़े मिलेंगे।

स्वीच ऑफ बताता फोन
अपनी जद में पहुंचते ही
मिसकॉल, अनरीड मेसेज की सूचनाएं भी
धड़धड़ाते हुए देगा।

पर नहीं
ऐसी अप्रत्याशित कोई
बात नहीं हुई
और फिर से
विज्ञान के तमाम करिश्मे
मेरे काम नहीं आए।

वंदना टेटे

वंदना टेटे (जन्मः 13 सितम्बर 1969) एक भारतीय आदिवासी लेखिका, कवि, प्रकाशक, एक्टिविस्ट और आदिवासी दर्शन ‘आदिवासियत’ की प्रबल पैरोकार हैं। सामुदायिक आदिवासी जीवनदर्शन एवं सौंदर्यबोध को अपने लेखन और देश भर के साहित्यिक व अकादमिक संगोष्ठियों में दिए गए वक्तव्यों के जरिए उन्होंने आदिवासी विमर्श को नया आवेग प्रदान किया है।

वंदना टेटे (जन्मः 13 सितम्बर 1969) एक भारतीय आदिवासी लेखिका, कवि, प्रकाशक, एक्टिविस्ट और आदिवासी दर्शन ‘आदिवासियत’ की प्रबल पैरोकार हैं। सामुदायिक आदिवासी जीवनदर्शन एवं सौंदर्यबोध को अपने लेखन और देश भर के साहित्यिक व अकादमिक संगोष्ठियों में दिए गए वक्तव्यों के जरिए उन्होंने आदिवासी विमर्श को नया आवेग प्रदान किया है।

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