तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझसे तू किसी और ही मौसम की महक लायी थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुठ्ठीयाँ भर
1. झाझ और प्रेमिका मन के भीतर आती गयी तुम, जैसे आता है गोंद पेड़ों पर, प्रेम भर जाये तो बरस पड़ता है, शरीर के तनों पर! … तुम आयी! आकाश सकुचाया,
Moreहम सब तो खड़े हैं मक़तल में क्या हमको ख़बर इस बात की है जिस जुल्म को हम सौग़ात कहें सौग़ात वो काली रात की है हम जिसको मसीहा कह बैठे वो
Moreये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं? हैं लाखों रोग ज़माने में, क्यों इश्क़ है रुसवा बेचारा हैं
Moreपढ़ना-लिखना सीखो, ओ मेहनत करने वालों। पढ़ना-लिखना सीखो, ओ भूख से मरने वालों। क ख ग घ को पहचानो, अलिफ़ को पढ़ना सीखो। अ आ इ ई को हथियार, बनाकर लड़ना सीखो।
Moreतुम मुझे पहन सकते हो कि मैं ने अपने आप को धुले हुए कपड़े की तरह कई दफ़अ’ निचोड़ा है कई दफ़अ’ सुखाया है तुम मुझे चबा सकते हो कि मैं चूसने
Moreइस उम्र के बाद उस को देखा! आँखों में सवाल थे हज़ारों होंटों पे मगर वही तबस्सुम! चेहरे पे लिखी हुई उदासी लहजे में मगर बला का ठहराओ आवाज़ में गूँजती जुदाई
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