मेरे हाथ टटोलते हुए अपने ही गले को कर लेना चाहते हैं अपनी पकड़ मजबूत कि तुम्हारी ऐनक वाली आंखें चमक उठती हैं और यक-ब-यक दोनों हथेलियां नाभी पर रख याद करती
Moreजागते हुए मैं जिनसे दूर भागता रहता हूँ वे अक्सर मेरी नीन्द में प्रवेश करते हैं एक दुर्गम पहाड़ पर चढ़ने से बचता हूँ लेकिन वह मेरे सपने में प्रकट होता है
Moreहम छब्बीस थे छब्बीस जीती-जागती मशीनें; गीले तहखानों में बंद, जहां हम क्रेंडल और सुशका बनाने के लिए आटा गूंधते थे. हमारे तहखाने की खिड़की नमी के कारण हरे और कीचड़ भरी
More(रानीखेत; जुलाई, 1975) कहते हैं, आदमी को पूरी निर्ममता से अपने अतीत में किये कार्यों की चीर-फाड़ करनी चाहिए, ताकि वह इतना साहस जुटा सके कि हर दिन थोड़ा-सा जी सके। लेकिन
Moreइश्क़ के आबो हवा में इतमिनानी और थी ये कहानी और थी ज़िंदग़ानी और थी ख़लवतों का दौर आया होके उनसे मुतमईन ज़िन्दग़ी के कारवाँ की बेनिशानी और थी रख सके न
Moreमहीनों बाद दफ़्तर आ रहे हैं हम एक सदमे से बाहर आ रहे हैं तेरी बाहों से दिल उकता गया हैं अब इस झूले में चक्कर आ रहे हैं कहाँ सोया है
Moreतू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझसे तू किसी और ही मौसम की महक लायी थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुठ्ठीयाँ भर
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