कवियों को ढूँढो, मेरे दोस्त ने कहा वे उन चीज़ों के बारे में बातें नहीं करेंगे जिनके बारे में तुम और मैं बातें करते हैं वे आर्थिक एकीकरण या वित्तीय चकबंदी की
Moreफिर छिड़ी रात बात फूलों की रात है या बारात फूलों की फूल के हार, फूल के गजरे शाम फूलों की रात फूलों की आपका साथ, साथ फूलों का आपकी बात, बात
Moreये जो ज़िंदगी है ये कौन है ये जो बेबसी है ये कौन है ये तुम्हारे लम्स को क्या हुआ ये जो बे-हिसी है ये कौन है वो जो मेरे जैसा था
Moreएक आजकल कानों में आवाज़ें बहुत आती हैं इधर से चीखने, रोने, विलाप करने की, उधर से धमकियाँ, और ग़ालियाँ रंजिश से भरी वहाँ से लूट लो, पकड़ो इसे, अब छोड़ना मत
Moreवहाँ कोई नहीं है धिकते हुए लोहे की तरह लगती हैं अपनी ही सांसें खाँसते हुए अपाढ़ है उठना-बैठना आवाज़ जो रहती थी समय-असमय में तत्पर वह भी काया के भीतर कहीं
Moreसुबह की पहली किरण की तरह वो मेरे आंगन में छन्न से उतरी थी। उतरते ही टूटकर बिखर गई थी। और उसके बिखरते ही सारे आंगन में पीली-सी चमकदार रोशनी कोने-कोने तक
More1) किक्की के लिए तुम्हें बढ़ते हुए देखने से ज़्यादा सुखद मेरे लिए और कुछ नहीं परन्तु तुम ऐसे वक़्त में बड़ी हो रही हो मेरी बच्ची जब मानवता की हांफनी छूटी
Moreकिसी नगर में चार ब्राह्मण रहते थे। उनमें खासा मेल-जोल था। बचपन में ही उनके मन में आया कि कहीं चलकर पढ़ाई की जाए। अगले दिन वे पढ़ने के लिए कन्नौज नगर
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