मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
खंडित आस्थाओं की अपूर्ण प्रतिमाएँ पूर्णता की तलाश में स्थापित कर दी जाती हैं प्राचीन धरोहरों की तरह मंदिरों या समाहरणालय में क्षत विक्षत अंगों के साथ अमूर्त चाहनाएँ भी बोल पड़ती
Moreकिसी के प्रेम में पड़ जाने की सही-सही वजह नहीं बता पातीं कभी भी स्त्रियाँ जबकि पुरुषों के पास होते हैं एक सौ एक कारण स्त्रियों के पास अपने प्रेम के पात्र
Moreनदी पर कविता लिखने के लिए कवि को नाव होना होता है आग पर लिखने के लिए राख पानी पर पानी बन कर ही लिखा जा सकता है धरती पर लिखने के
Moreरातों को जो घरों से बाहर नहीं निकलती हैं वो स्त्रियाँ उगा लेती हैं आकाशगंगा छतों पर। दीवारों पर खिला देती हैं वसंत खिड़की में टांग देती हैं चाँद और उनकी पलंग
Moreबोलने में कम से कम बोलूँ कभी बोलूँ, अधिकतम न बोलूँ इतना कम कि किसी दिन एक बात बार-बार बोलूँ जैसे कोयल की बार-बार की कूक फिर चुप। मेरे अधिकतम चुप को
Moreकौन दुःख के इन सदाबहार फूलों को खाद-पानी देता है! मेरे भीतर एक क्षीण ध्वनि कराहती है “उसकी याद ही तो” मेरे चित्त के अरण्य में मेरी ही आत्मा का कोलाहल किसका
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