चाँद ने कहा है

चाँद ने कहा है, एक बार फिर चकोर से, इस जनम में भी जलोगे तुम ही मेरी ओर से… हर जनम का अपना चाँद है, चकोर है अलग, हर जनम के आँसुओं

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उत्तर आधुनिक आलोचक

जब मैंने भूख को भूख कहा प्यार को प्यार कहा तो उन्हें बुरा लगा जब मैंने पक्षी को पक्षी कहा आकाश को आकाश कहा वृक्ष को वृक्ष और शब्द को शब्द कहा

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राजा ने आदेश दिया

राजा ने आदेश दिया : बोलना बन्द क्योंकि लोग बोलते हैं तो राजा के विरुद्ध बोलते हैं। राजा ने आदेश दिया : लिखना बन्द क्योंकि लोग लिखते हैं तो राजा के विरुद्ध लिखते हैं।

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काली मिट्टी

काली मिट्टी काले घर दिनभर बैठे-ठाले घर काली नदिया काला धन सूख रहे हैं सारे बन काला सूरज काले हाथ झुके हुए हैं सारे माथ काली बहसें काला न्याय खाली मेज पी

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एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए

एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए आगाज़े-आशिक़ी का मज़ा आप

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इतने भले नहीं बन जाना

इतने भले नहीं बन जाना साथी जितने भले हुआ करते हैं सरकस के हाथी गदहा बनने में लगा दी अपनी सारी कुव्वत सारी प्रतिभा किसी से कुछ लिया नहीं न किसी को

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उपक्रम

बुझी हुई रातों की करवटों में ऊंघते अनमने ढंग से सन्नाटे और अंधेरे में मैंने बो रखी हैं कुछ तस्वीरें कुछ मोह-पाश जो तेज झंझावात में पानी की तरह बह निकलते हैं

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दुनिया

हिलती हुई मुँडेरें हैं और चटखे हुए हैं पुल बररे हुए दरवाज़े हैं और धँसते हुए चबूतरे दुनिया एक चुरमुरायी हुई-सी चीज़ हो गई है दुनिया एक पपड़ियायी हुई-सी चीज़ हो गई

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परियों की बातें

मैं अपने दोस्त के पास बैठा था। उस वक़्त मेरे दिमाग़ में सुक़्रात का एक ख़याल चक्कर लगा रहा था— क़ुदरत ने हमें दो कान दिये हैं और दो आंखें मगर ज़बान

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