मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
इस दुनिया में आने-जाने के लिए अगर एक ही रास्ता होता और नज़र चुराकर बच निकलने के हज़ार रास्ते हम निकाल नहीं पाते तो वही एकमात्र रास्ता हमारा प्रायश्चित होता और ज़िंदगी
Moreघर नहीं छोड़ता कोई आदमी जब तक कि घर किसी शार्क का जबड़ा न लगे तुम, बस, भाग पड़ते हो सीमा की ओर जब पाते हो कि समूचा शहर ही भाग रहा
Moreटोह में नहीं रहता मैं किसी शब्द की कि वह आए और लिख लिख जाए मर्ज़ी जब होगी तब आएगा कोई भी रोक नहीं पाएगा अदबदा कर आँसू ज्यों आँख से छलक
Moreसाँप पालने वाली लड़की साँप काटे से मरती है गले में खिलौना आला लगा डॉक्टर बनने का स्वांग करती लड़की ग़लत दवा की चार बूँदें ज़्यादा पीने से चिट्ठियों में धँसी लड़की
Moreपरीक्षा में फ़ेल हो जाने पर या माँ-बाप से लड़कर घर से भाग जाता है लड़का दुख व्यक्त करते हैं लोग लड़का कहीं कर लेता है दो रोटी का जुगाड़ या फिर
Moreडबाडबा गई है तारों-भरी शरद से पहले की यह अँधेरी नम रात । उतर रही है नींद सपनों के पंख फैलाए छोटे-मोटे ह्ज़ार दुखों से जर्जर पंख फैलाए उतर रही है नींद
Moreउन्होंने उसके मुँह पर ज़ंजीरें कस दीं मौत की चट्टान से बाँध दिया उसे और कहा — तुम हत्यारे हो उन्होंने उससे भोजन, कपड़े और अण्डे छीन लिए फेंक दिया उसे मृत्यु-कक्ष
Moreनदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही रुबाई हूँ मुझे ऊँचाइयों का वह अकेलापन नहीं भाया लहर होते हुये भी तो मेरा
Moreविचार आते हैं लिखते समय नहीं बोझ ढोते वक़्त पीठ पर सिर पर उठाते समय भार परिश्रम करते समय चांद उगता है व पानी में झलमलाने लगता है हृदय के पानी में
Moreचाँद ने कहा है, एक बार फिर चकोर से, इस जनम में भी जलोगे तुम ही मेरी ओर से… हर जनम का अपना चाँद है, चकोर है अलग, हर जनम के आँसुओं
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