घर से भागी हुई लड़की

1 min read

परीक्षा में फ़ेल हो जाने पर
या माँ-बाप से लड़कर
घर से भाग जाता है लड़का
दुख व्यक्त करते हैं लोग

लड़का कहीं कर लेता है
दो रोटी का जुगाड़
या फिर कुछ दिन घूम-फिरकर
लौट आता है अपने घर

ख़ुशियों से भर जाता है घर
जैसे लम्बे सूखे के बाद
वर्षा की बूँदों का झरना
पतझड़ के बाद बसंत का आ जाना ।

सौतेली माँ के उत्पीड़न से
या
शराबी बाप के आतंक से
घर से भाग जाती है लड़की कभी
गाँव भर में शुरू हो जाता है
चर्चाओं का उफ़ान

आँगन हो / गली हो / पनघट हो
या चाय की दुकान
आ ही जाती है उसके भागने की बात
तरह-तरह की आकाँक्षाएँ
संबंधों की बातें
जितने मुँह उतने अफ़साने

दो-चार दिन में लौट आती है लड़की
घर में बढ़ जाता है तनाव
कहीं कोई ख़ुशी नहीं
मर क्यों नहीं गई
मर ही जाती
क्यों लौट आई यह लड़की ।

महेश चंद्र पुनेठा

महेश चंद्र पुनेठा (जन्म - 1971) हिंदी के माने हुए कवियों में से एक हैं. आपकी पहचान भय अतल में, स्वर एकादश व् कवि द्वादश जैसे काव्य संग्रहों के लेखकों के रूप में है.

महेश चंद्र पुनेठा (जन्म - 1971) हिंदी के माने हुए कवियों में से एक हैं. आपकी पहचान भय अतल में, स्वर एकादश व् कवि द्वादश जैसे काव्य संग्रहों के लेखकों के रूप में है.

नवीनतम

फूल झरे

फूल झरे जोगिन के द्वार हरी-हरी अँजुरी में भर-भर के प्रीत नई रात करे चाँद की

पाप

पाप करना पाप नहीं पाप की बात करना पाप है पाप करने वाले नहीं डरते पाप

तुमने छोड़ा शहर

तुम ने छोड़ा शहर धूप दुबली हुई पीलिया हो गया है अमलतास को बीच में जो