हिंदू बनाम हिंदू

भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई, हिंदू धर्म में उदारवाद और कट्टरता की लड़ाई पिछले पाँच हजार सालों से भी अधिक समय से चल रही है और उसका अंत अभी भी दिखाई

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चालीस के बाद प्रेम

श्‍यामलाल एक क्षण ठिठके, फिर नाले में उतर पड़े। नाले में कीचड़ नहीं था; उसमें सूखी पत्तियाँ, अद्धे, गुम्‍मे, चीथड़े और एक खास तरह की धूल थी जो मोहल्‍ले के लोगों ने

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ठगे जाने में संतोष

मुझे अपनी कविताओं से भय होता है, जैसे मुझे घर जाते हुए भय होता है। * अच्छे आदमी बनो – रोज मैं सोचता हूँ। क्या सोच कर अच्छा आदमी हुआ जा सकता

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पर्दे पर शब्द मुझे वैसे ही लगते हैं जैसे नीले आसमान में तारे

शुरू में कविता बोली जाती थी। सुनी जाती थी। मुँहा-मुँही फैलती थी। कंठस्थ होती थी। इस क्रम में कुछ हेर-फेर भी होता होगा। जितने मुँह और जितने कंठों से कोई शब्द कोई

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फूल आए हैं कनेरों में

नवगीत विधा के वरिष्ठ कवि माहेश्वर तिवारी से मेरा बादरायण संबंध है। इस संबंध के बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे। यह संस्कृत के विद्वत्‌ समाज का एक प्रचलित शब्द है,

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चिकित्सा का चक्कर

मैं बिलकुल हट्टा-कट्टा हूँ। देखने में मुझे कोई भला आदमी रोगी नहीं कह सकता। पर मेरी कहानी किसी भारतीय विधवा से कम करुण नहीं है, यद्यपि मैं विधुर नहीं हूँ। मेरी आयु

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क्षमा

क्षमा करो कि अब तक जो कहा क्षमा करो उसके लिए कि भी मेरे मरने के बाद भी जो कुछ कहा जाएगा क्षमा भी एक किस्म की मौत है जिसे माँगने वाला

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माँ का दुःख

कितना प्रामाणिक था उसका दुःख लड़की को दान में देते वक्त जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो लड़की अभी सयानी नहीं थी अभी इतनी भोली सरल थी कि उसे सुख का आभास

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