समय की नदी

1 min read
हम समय की नदी
तैर कर आ गए
अब खड़े हैं जहाँ
वह जगह कौन है?

तोड़ते-जोड़ते
हर नियम, उपनियम
उत्सवों के जिए
साँस-दर-साँस हम
एक पूरी सदी
तैर कर आ गए
अब खड़े हैं जहाँ
वह सतह कौन है?

होंठ पर
थरथराती हँसी
रोप कर
आँसुओं को पिया
आँख में उम्र भर
हम कठिन त्रासदी
तैर कर आ गए
अब खड़े हैं जहाँ
नागदह कौन है?

 

माहेश्वर तिवारी

माहेश्वर तिवारी (जन्म – 22 जुलाई 1939) हिंदी के प्रसिद्ध गीतकार हैं. आपकी रचनायें सभी प्रमुख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा कई समवेत संग्रहों में प्रकाशित हैं.

नवीनतम

फूल झरे

फूल झरे जोगिन के द्वार हरी-हरी अँजुरी में भर-भर के प्रीत नई रात करे चाँद की

पाप

पाप करना पाप नहीं पाप की बात करना पाप है पाप करने वाले नहीं डरते पाप

तुमने छोड़ा शहर

तुम ने छोड़ा शहर धूप दुबली हुई पीलिया हो गया है अमलतास को बीच में जो