कुछ आवाज़ें मलहम होती हैं

तुम्हारी आवाज़ की उँगली पकड़े मैं करती हूँ यात्रा अधैर्य से धैर्य की आक्रोश से प्रेम की उद्वेग से शांति की विषम से सम की तुम्हारी आवाज़ के आरोह-अवरोह में समा जाते

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अमांडा लवलेस की कविताएँ

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1. मुझसे यह कहना कि हर मर्द के इरादे बुरे नहीं होते कुछ नहीं करता मुझे आश्वस्त करने के लिए तुमसे कुछ दूर चले जाने के बाद भी कुछ नहीं बदला होगा

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क्षमा

क्षमा करो कि अब तक जो कहा क्षमा करो उसके लिए कि भी मेरे मरने के बाद भी जो कुछ कहा जाएगा क्षमा भी एक किस्म की मौत है जिसे माँगने वाला

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माँ का दुःख

कितना प्रामाणिक था उसका दुःख लड़की को दान में देते वक्त जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो लड़की अभी सयानी नहीं थी अभी इतनी भोली सरल थी कि उसे सुख का आभास

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पुनर्राचनाएँ

(ये कविताएँ पहाड़ के दूर दराज क्षेत्रों के ऐसे लोकगीतों से प्रेरित हैं जिन्हें लोक कविताएँ कहना ज्यादा सही होगा पर ये उनके अनुवाद नहीं हैं।) 1. तुम्हें कहीं खोजना असंभव था

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घर पहुँचना

हम सब एक सीधी ट्रेन पकड़ कर अपने अपने घर पहुँचना चाहते हम सब ट्रेनें बदलने की झंझटों से बचना चाहते हम सब चाहते एक चरम यात्रा और एक परम धाम हम

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काली मिट्टी

काली मिट्टी काले घर दिनभर बैठे-ठाले घर काली नदिया काला धन सूख रहे हैं सारे बन काला सूरज काले हाथ झुके हुए हैं सारे माथ काली बहसें काला न्याय खाली मेज पी

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घर से भागी हुई लड़कियाँ

(एक ) हौव्वा नहीं होतीं घर से भागी हुई लड़कियाँ पहनतीं हैं पूरे कपड़े संभाल के रखती हैं ख़ुद को एक करवट में गुजारी रात के बाद सुबह अँधेरे पिता को प्रणाम

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यह लड़की जब उदास होगी

यह लड़की जब उदास होगी तो क्या सोचेगी? आज नहीं कल नहीं बरसों बाद यह लड़की जब उदास होगी तो क्या सोचेगी भला? शायद वह सोचेगी उस प्रेम के बारे में जो

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