मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
वे उतनी ही लड़ाकू थीं जितना कि उनका सेनापति वे अपनी ख़ूबसूरती से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक थीं अपने जूड़े में उन्होंने सरहुल और ईचा बा की जगह साहस का फूल खोंसा था
Moreपीपल होतीं तुम पीपल, दीदी पिछवाड़े का, तो तुम्हारी खूब घनी-हरी टहनियों में हारिल हम बसेरा लेते हारिल होते हैं हमारी तरह ही घोंसले नहीं बनाते कहीं बसते नहीं कभी दूर पहाड़ों
Moreहरी बिछली घास। दोलती कलगी छरहरे बाजरे की। अगर मैं तुम को ललाती साँझ के नभ की अकेली तारिका अब नहीं कहता, या शरद के भोर की नीहार – न्हायी कुँई, टटकी
More1. मुश्किल इस युग में जितना आसान है कवि बनना उससे भी ज़्यादा सहूलियत भरा किनारे कर दिया जाना युद्ध के बाद भूखी भीड़ टूट पड़ी है आसमान से बरसती सहायता पर
Moreजिल्द की सबसे छोटी कहानी कभी यह शिकायत नहीं करती कि लम्बी कहानी ने उसका हक़ मार लिया एक छोटी ज़िन्दगी का सत्व सौ साल जीने वाला कोई चुरा नहीं सकता। आज
Moreनाचती हुई स्त्री घूमती हुई पृथ्वी है जिसके पैरों में बँधे हैं दिन और रात जिसके हाव-भाव और मुद्राओं के साथ बदलते हैं मौसम पृथ्वी का केंद्रबिंदु है बैली डांस करती स्त्री की
Moreनामुमकिन है यह बतलाना कि एक कवि कविता के भीतर कितना और कितना रहता है एक कवि है जिसका चेहरा-मोहरा, ढाल-चाल और बातों का ढब भी उसकी कविता से इतना ज्यादा मिलता-जुलता
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