नयी कविता : प्रयोग के आयाम

तार सप्तक की भूमिका प्रस्तुत करते समय इन पंक्तियों के लेखक में जो उत्साह था, उस में संवेदना की तीव्रता के साथ निःसन्देह अनुभवहीनता का साहस भी रहा होगा। संवेदना की तीव्रता

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शरतचंद्र का पत्र रबीन्द्रनाथ टैगोर के नाम

[टैगोर के पत्र  https://www.ummeedein.com/rabindranath-tagore-ka-patra-sharatchandra-ke-naam/ के उत्तर में शरतचंद्र ने कवि को जो पत्र लिखा उसके शब्द-शब्द से आक्रोश टपका पड़ता है। संयम जैसे हाथ से छूट गया है। अच्छा यही था कि

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रबीन्द्रनाथ टैगोर का पत्र शरतचंद्र के नाम

[शरतचंद्र की किताब ‘पथेर दाबी’ पे अपना मत व्यक्त करते हुए रबीन्द्रनाथ टैगोर का पत्र] कल्याणयेषु ! तुम्हारा ‘पथेर दाबी’ पढ़ लिया। पुस्तक उत्तेजक है, अर्थात् अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध पाठकों के

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लाल पान की बेग़म

‘क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?’ बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का लड़का बिरजू शकरकंद के बदले तमाचे

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मैं फ़िलॉसफ़र नहीं हूँ

मैं आपसे पहले ही कह चुका हूँ कि मैं लिख नहीं सकता, क्योंकि दिमाग में ख़यालात इतने बारीक आते हैं कि जिनको जाहिर करने के लिए मुझे भाषा नहीं मिलती। आप खुद

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मेंटल

हम सब लोग उसे पागल करार दे चुके थे। शक-शुबह की कहीं कोई गुंजाइश नहीं थी। इस किस्से से पहले वह हम लोगों की तरह ही नॉर्मल था। पिछले पन्द्रह सालों में

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औरतें

कुछ औरतों ने अपनी इच्छा से कूदकर जान दी थी ऐसा पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज़ है और कुछ औरतें अपनी इच्छा से चिता में जलकर मरी थीं ऐसा धर्म की किताबों

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सवाल ज्यादा हैं

पुराने शहर उड़ना चाहते हैं लेकिन पंख उनके डूबते हैं अक्सर खून के कीचड़ में! मैं अभी भी उनके चौराहों पर कभी भाषण देता हूँ जैसा कि मेरा काम रहा वर्षों से

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लिहाफ़

जब मैं जाड़ों में लिहाफ़ ओढ़ती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है। और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया के पर्दों

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बहता पानी निर्मला

मुझे बचपन से नक़्शे देखने का शौक़ है। आप समझेंगे कि कुछ भूगोल विज्ञान की तरफ़ प्रवृत्ति होगी – नहीं, सो बात नहीं; असल बात यह है कि नक्शों के सहारे दूर-दुनिया

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