गिरना

चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं। मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते। लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं अपने गिरने के बारे में मनुष्य कर सकते हैं

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ठेस

खेती-बारी के समय, गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं । इसलिए, खेत-खलिहान की मजदूरी के लिए कोई नहीं बुलाने जाता है सिरचन

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हमारी हिंदी

हमारी हिंदी एक दुहाजू की नई बीबी है बहुत बोलने वाली बहुत खानेवाली बहुत सोनेवाली गहने गढ़ाते जाओ सर पर चढ़ाते जाओ वह मुटाती जाए पसीने से गन्धाती जाए घर का माल

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मैं तुझे फिर मिलूँगी

मैं तुझे फिर मिलूँगी कहाँ कैसे पता नहीं शायद तेरे कल्पनाओं की प्रेरणा बन तेरे केनवास पर उतरुँगी या तेरे केनवास पर एक रहस्यमयी लकीर बन ख़ामोश तुझे देखती रहूँगी मैं तुझे

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तुम्हारे साथ रहकर

तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गयी है जो खचाखच भरा है,

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इतना सहज नहीं है विश्व

इतना सहज नहीं है विश्व कि झरने झरते रहें पहाड़ कभी झुकें ही नहीं नदी आए और कहे कि मैं हमेशा बहूँगी तुम्हारे साथ शहर के क़ानून तुम्हारे मुताबिक़ मानवीय हो जाएँ

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तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो। आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो।। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही नहीं है ज़िन्दगी, रेंग कर मर-मर

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छतों पर लड़कियाँ

अब भी छतों पर आती हैं लड़कियाँ मेरी ज़िन्दगी पर पड़ती हैं उनकी परछाइयाँ। गो कि लड़कियाँ आयी हैं उन लड़कों के लिए जो नीचे गलियों में ताश खेल रहे हैं नाले

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हार की जीत

नहीं, मुझे अपनी परवाह नहीं परवाह नहीं हारें कि जीतें हारते तो रहे ही हैं शुरू से लेकिन हार कर भी माथा उठ रहा और आत्मा रही जयी यवांकुर-सी हर बार सो,

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