मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
हमारी हिंदी एक दुहाजू की नई बीबी है बहुत बोलने वाली बहुत खानेवाली बहुत सोनेवाली गहने गढ़ाते जाओ सर पर चढ़ाते जाओ वह मुटाती जाए पसीने से गन्धाती जाए घर का माल
Moreले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के, अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के। कह रही है झोपड़ी औ’ पूछते हैं खेत भी, कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे
Moreमैं तुझे फिर मिलूँगी कहाँ कैसे पता नहीं शायद तेरे कल्पनाओं की प्रेरणा बन तेरे केनवास पर उतरुँगी या तेरे केनवास पर एक रहस्यमयी लकीर बन ख़ामोश तुझे देखती रहूँगी मैं तुझे
Moreतुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गयी है जो खचाखच भरा है,
Moreइतना सहज नहीं है विश्व कि झरने झरते रहें पहाड़ कभी झुकें ही नहीं नदी आए और कहे कि मैं हमेशा बहूँगी तुम्हारे साथ शहर के क़ानून तुम्हारे मुताबिक़ मानवीय हो जाएँ
Moreतय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो। आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो।। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही नहीं है ज़िन्दगी, रेंग कर मर-मर
Moreअब भी छतों पर आती हैं लड़कियाँ मेरी ज़िन्दगी पर पड़ती हैं उनकी परछाइयाँ। गो कि लड़कियाँ आयी हैं उन लड़कों के लिए जो नीचे गलियों में ताश खेल रहे हैं नाले
Moreनहीं, मुझे अपनी परवाह नहीं परवाह नहीं हारें कि जीतें हारते तो रहे ही हैं शुरू से लेकिन हार कर भी माथा उठ रहा और आत्मा रही जयी यवांकुर-सी हर बार सो,
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