केवल दो गीत लिखे मैंने

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केवल दो गीत लिखे मैंने

केवल दो गीत लिखे मैंने
इक गीत तुम्हारे मिलने का
इक गीत तुम्हारे खोने का

सड़कों-सड़कों, शहरों-शहरों
नदियों-नदियों, लहरों-लहरों
विश्वास किये जो टूट गए
कितने ही साथी छूट गए
पर्वत रोये-सागर रोये
नयनों ने भी मोती खोये
सौगन्ध गुंथी सी अलकों में
गंगा-जमुना सी पलकों में

केवल दो स्वप्न बुने मैंने
इक स्वप्न तुम्हारे जगने का
इक स्वप्न तुम्हारे सोने का

बचपन-बचपन, यौवन-यौवन
बन्धन-बन्धन, क्रंदन-क्रंदन
नीला अम्बर, श्यामल मेघा
किसने धरती का मन देखा
सबकी अपनी है मजबूरी
चाहत के भाग्य लिखी दूरी
मरुथल-मरुथल, जीवन-जीवन
पतझर-पतझर, सावन-सावन

केवल दो रंग चुने मैंने
इक रंग तुम्हारे हंसने का
इक रंग तुम्हारे रोने का

केवल दो गीत लिखे मैंने
इक गीत तुम्हारे मिलने का
इक गीत तुम्हारे खोने का

राजेंद्र राजन
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले राजेन्द्र राजन के 'पतझर-पतझर सावन-सावन' (काव्य-संकलन), 'केवल दी गीत लिखे मैंने' (गीत-संग्रह) चर्चित संग्रह हैं। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। वर्ष 1977 से गीतकार के रूप में लालकिला, राष्ट्रपति भवन आदि अनेक राष्ट्रीय काव्य-मंचों, कवि सम्मेलनों, मुशायरों में काव्यपाठ तथा आकाशवाणी-दूरदर्शन के विभिन्न केंद्रों से काव्य-प्रसारण भी होता रहा है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले राजेन्द्र राजन के 'पतझर-पतझर सावन-सावन' (काव्य-संकलन), 'केवल दी गीत लिखे मैंने' (गीत-संग्रह) चर्चित संग्रह हैं। इसके अलावा विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। वर्ष 1977 से गीतकार के रूप में लालकिला, राष्ट्रपति भवन आदि अनेक राष्ट्रीय काव्य-मंचों, कवि सम्मेलनों, मुशायरों में काव्यपाठ तथा आकाशवाणी-दूरदर्शन के विभिन्न केंद्रों से काव्य-प्रसारण भी होता रहा है।

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