1. रसोईघर माँ के हाथ जब भी मेरे कपड़े पर पड़ते उनमें से आटे, हल्दी और खड़े मसालों की ख़ुशबू आने लगती मैंने उसे तेईस सालों से रसोईघर के आस-पास ही देखा
उधर के चोर भी अजीब हैं लूट और डकैती के अजीबो-गरीब किस्से – कहते हैं ट्रेन-डकैती सात बजते-बजते संपन्न हो जाती है क्योंकि डकैतों को जल्दी सोने की आदत है और चूँकि
Moreमेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे इस बूढ़े पीपल की छाया में सुस्ताने आएँगे हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेड़ो मत हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आएँगे थोड़ी आँच
Moreन जाने हुई बात क्या मन इधर कुछ बदल-सा गया है मुझे अब बहुत पूछने तुम लगी हो उधर नींद थी इन दिनों तुम जगी हो यही बात होगी अगर कुछ न
More1. स्मृतियों के अवशेष अवचेतन में सोए रहते हैं पुरानी डायरी की सोंधी सुगंध से एकाएक उठ बैठती हैं अल्हड़ जवान स्मृतियां और ठहाके मारकर हंसती हैं जैसे एक बच्चा खिलखिला रहा
More1. प्रेमिकाएं मैं किसी से कैसे प्रेम करूँ? लगभग मेरी सभी प्रेमिकाओं ने मुझे निराश किया है अब तक सूखे मौसम की तरह! आकाश भर प्रेम के बदले दुनिया भर की टूटी
More1. आवरण आँखों का अस्तित्व हर तरह की सत्ता के लिए ख़तरा है इसलिए आये दिन आँखें फोड़ दी जाने की ख़बरें हैं इससे पहले आपकी भी आँखें फोड़ दी जाएँ नज़र
More1. हमें 'हम' होना चाहिए हम बिछड़कर मर जायेंगे "मैं" और "तुम" में जबकि 'हम' में कितना सामर्थ्य है कि चींटियां अपने देह से भारी मलवा खींच ले जाती हैं 'हम' होकर
More1. रसोईघर माँ के हाथ जब भी मेरे कपड़े पर पड़ते उनमें से आटे, हल्दी और खड़े मसालों की ख़ुशबू आने लगती मैंने उसे तेईस सालों से रसोईघर के आस-पास ही देखा
More1. तुम्हें सौगंध है, मेरे क़ातिल प्रेम करने के लिए नादान होना उतना ही है आवश्यक जितना कि जीवित रहने के लिए उम्मीद का होना। तुम्हारे खंजर से टपकते मेरे लहू की
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