कविता क्या है हाथ की तरफ़ उठा हुआ हाथ देह की तरफ़ झुकी हुई आत्मा मृत्यु की तरफ़ घूरती हुई आँखें क्या है कविता कोई हमला हमले के बाद पैरों को खोजते
Moreजिंदगी के दौरान जो तजुर्बे हासिल होते हैं, उनसे नसीहतें लेने का सबक तो हमारे यहाँ सैकड़ों बार पढ़ाया गया है। होशियार और बेवकूफ में फर्क बताते हुए, एक बहुत बड़े विचारक
Moreतार सप्तक की भूमिका प्रस्तुत करते समय इन पंक्तियों के लेखक में जो उत्साह था, उस में संवेदना की तीव्रता के साथ निःसन्देह अनुभवहीनता का साहस भी रहा होगा। संवेदना की तीव्रता
More[टैगोर के पत्र https://www.ummeedein.com/rabindranath-tagore-ka-patra-sharatchandra-ke-naam/ के उत्तर में शरतचंद्र ने कवि को जो पत्र लिखा उसके शब्द-शब्द से आक्रोश टपका पड़ता है। संयम जैसे हाथ से छूट गया है। अच्छा यही था कि
More[शरतचंद्र की किताब ‘पथेर दाबी’ पे अपना मत व्यक्त करते हुए रबीन्द्रनाथ टैगोर का पत्र] कल्याणयेषु ! तुम्हारा ‘पथेर दाबी’ पढ़ लिया। पुस्तक उत्तेजक है, अर्थात् अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध पाठकों के
More‘क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?’ बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का लड़का बिरजू शकरकंद के बदले तमाचे
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