दुनिया मेरी भैंस

मैं अहीर हूँ और ये दुनिया मेरी भैंस है मैं उसे दुह रहा हूँ और कुछ लोग कुदा रहे हैं ये कउन (कौन) लोग हैं जो कुदा रहे हैं ? आपको पता है.

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नया भारत

तुम बिल्कुल हम जैसे निकले अब तक कहाँ छिपे थे भाई वो मूरखता, वो घामड़पन जिसमें हमने सदी गँवाई आखिर पहुँची द्वार तुम्हारे अरे बधाई, बहुत बधाई । प्रेत धर्म का नाच

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प्रायश्चित

इस दुनिया में आने-जाने के लिए अगर एक ही रास्ता होता और नज़र चुराकर बच निकलने के हज़ार रास्ते हम निकाल नहीं पाते तो वही एकमात्र रास्ता हमारा प्रायश्चित होता और ज़िंदगी

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घर

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घर नहीं छोड़ता कोई आदमी जब तक कि घर किसी शार्क का जबड़ा न लगे तुम, बस, भाग पड़ते हो सीमा की ओर जब पाते हो कि समूचा शहर ही भाग रहा

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शब्द

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टोह में नहीं रहता मैं किसी शब्द की कि वह आए और लिख लिख जाए मर्ज़ी जब होगी तब आएगा कोई भी रोक नहीं पाएगा अदबदा कर आँसू ज्यों आँख से छलक

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बुरी लड़कियाँ, अच्छी लड़कियाँ

साँप पालने वाली लड़की साँप काटे से मरती है गले में खिलौना आला लगा डॉक्टर बनने का स्वांग करती लड़की ग़लत दवा की चार बूँदें ज़्यादा पीने से चिट्ठियों में धँसी लड़की

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घर से भागी हुई लड़की

परीक्षा में फ़ेल हो जाने पर या माँ-बाप से लड़कर घर से भाग जाता है लड़का दुख व्यक्त करते हैं लोग लड़का कहीं कर लेता है दो रोटी का जुगाड़ या फिर

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उम्र पोशी

मैंने पूछा — मुन्ने! तुम क्यूँ अपनी अम्मी जान को बाजी कहते हो मुन्ना बोला बाजी भी तो नानी-जी को आपा आपा कहती हैं इस बाज़ार का जो कोठा है उस की

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वाहिमा

तुम्हारा कहना है तुम मुझे बे-पनाह शिद्दत से चाहते हो तुम्हारी चाहत विसाल की आख़िरी हदों तक मिरे फ़क़त मेरे नाम होगी मुझे यक़ीं है मुझे यक़ीं है मगर क़सम खाने वाले

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हे भले आदमियों

डबाडबा गई है तारों-भरी शरद से पहले की यह अँधेरी नम रात । उतर रही है नींद सपनों के पंख फैलाए छोटे-मोटे ह्ज़ार दुखों से जर्जर पंख फैलाए उतर रही है नींद

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