मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
वह रानी, कि चन्द्रमा जिसका मुकुट है, आकाश जिसका आसन है, जो जमशेद जैसी प्रतापी है, फरीदून जैसी तेजस्वी और काऊस जैसा स्थान रखने वाली है, उसके पास संजर जैसा दबदबा है
Moreसमय की शिला पर मधुर चित्र कितने किसी ने बनाए, किसी ने मिटाए। किसी ने लिखी आँसुओं से कहानी किसी ने पढ़ा किन्तु दो बूँद पानी इसी में गए बीत दिन ज़िन्दगी
Moreसुनो, व्यर्थ गई तुम्हारी आराधना! अर्घ्य से भला पत्थर नम हो सके कभी? बजबजाती नालियों में पवित्र जल सड़ गया आखिर! मैं देव न हुआ! सुनो, प्रेम पानी जैसा है तुम्हारे
Moreएक स्त्री के कारण तुम्हें मिल गया एक कोना तुम्हारा भी हुआ इंतज़ार एक स्त्री के कारण तुम्हें दिखा आकाश और उसमें उड़ता चिड़ियों का संसार एक स्त्री के कारण तुम बार-बार
Moreउठाया ही था पहला कौर कि पगहा तुड़ाकर भैंस भागी कहीं और पहुंचा ही था खेत में पानी कि छप्पर में आग लगी, बिटिया चिल्लानी आरंभ ही किया था गीत का बोल
Moreउस पुरानी मेज के इर्द-गिर्द हम चार-पांच लोग बैठे बतिया रहे थे। बात सतही तौर पर राजनीति से शुरू होती थी और बाजार भावों पर आकर अटक जाती थी। आप जानते ही
Moreमैं कूर्सकी रेलवे स्टेशन पहुँचा जहाँ से ठीक नौ बजे सिम्फिरापोल्स्की एक्सप्रेस ट्रेन को छूटना था। टी.टी. ने मेरा टिकट देखा और मैं डिब्बे में घुस गया। वहाँ पहले से ही एक
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