इतना सहज नहीं है विश्व

इतना सहज नहीं है विश्व कि झरने झरते रहें पहाड़ कभी झुकें ही नहीं नदी आए और कहे कि मैं हमेशा बहूँगी तुम्हारे साथ शहर के क़ानून तुम्हारे मुताबिक़ मानवीय हो जाएँ

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तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो। आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो।। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही नहीं है ज़िन्दगी, रेंग कर मर-मर

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हार की जीत

नहीं, मुझे अपनी परवाह नहीं परवाह नहीं हारें कि जीतें हारते तो रहे ही हैं शुरू से लेकिन हार कर भी माथा उठ रहा और आत्मा रही जयी यवांकुर-सी हर बार सो,

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खोया हरा सुग्गा

जैसे हाथ से दमड़ी खो जाती है जैसे खेलते वक्त निशाना मारने पर कभी-कभी टन्ना खो जाता है जैसे अंगुलियों से रेंड़ी छूट जाती है जैसे देखते ही देखते हवा में उड़

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ज़िस्म की भूख

ज़िस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें। सतही जज्बे को मुनासिब नहीं है प्यार कहें॥ बारहा फ़र्द की अज़मत ने जिसे मोड़ दिया। हम भला कैसे उसे वक़्त की रफ़्तार

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मेरे काम की नहीं

बहुत उम्मीद थी कि लौटते ही ढेर सारे बंद लिफाफे गेट पर लगे बक्से में बेतरतीब पड़े मिलेंगे। स्वीच ऑफ बताता फोन अपनी जद में पहुंचते ही मिसकॉल, अनरीड मेसेज की सूचनाएं

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तुम्हारे भीतर

एक स्त्री के कारण तुम्हें मिल गया एक कोना तुम्हारा भी हुआ इंतज़ार एक स्त्री के कारण तुम्हें दिखा आकाश और उसमें उड़ता चिड़ियों का संसार एक स्त्री के कारण तुम बार-बार

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जीवन वृत्तांत

उठाया ही था पहला कौर कि पगहा तुड़ाकर भैंस भागी कहीं और पहुंचा ही था खेत में पानी कि छप्पर में आग लगी, बिटिया चिल्लानी आरंभ ही किया था गीत का बोल

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प्रायश्चित

इस दुनिया में आने-जाने के लिए अगर एक ही रास्ता होता और नज़र चुराकर बच निकलने के हज़ार रास्ते हम निकाल नहीं पाते तो वही एकमात्र रास्ता हमारा प्रायश्चित होता और ज़िंदगी

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बुरी लड़कियाँ, अच्छी लड़कियाँ

साँप पालने वाली लड़की साँप काटे से मरती है गले में खिलौना आला लगा डॉक्टर बनने का स्वांग करती लड़की ग़लत दवा की चार बूँदें ज़्यादा पीने से चिट्ठियों में धँसी लड़की

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