शुन्यता

जब बिखरी हुई यादें पड़ी होती हैं काली रौशनी के मानिंद तो ग़ैर-जरूरी चीजें साथ देती हैं मसलन खुली सड़क को ताकना ठंडी चाय की छाली हटा कर पीना और फिर सब

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ग़ुलामी की अंतिम हदों तक लड़ेंगे

इस ज़माने में जिनका ज़माना है भाई उन्हीं के ज़माने में रहते हैं हम उन्हीं की हैं सहते, उन्हीं की हैं कहते उन्हीं की ख़ातिर दिन-रात बहते हैं हम ये उन्हीं का

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वसीयत

भला राख की ढेरी बनकर क्या होगा ? इससे तो अच्छा है कि जाने के पहले अपना सब कुछ दान कर जाऊँ। अपनी आँखें मैं अपनी स्पेशल के ड्राइवर को दे जाऊँगा। ताकि

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ये बातें झूठी बातें हैं

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलाई हैं तुम इंशा जी का नाम न लो, क्या इंशा जी सौदाई हैं? हैं लाखों रोग ज़माने में, क्यों इश्क़ है रुसवा बेचारा हैं

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तय करो किस ओर हो तुम

तय करो किस ओर हो तुम तय करो किस ओर हो। आदमी के पक्ष में हो या कि आदमखोर हो।। ख़ुद को पसीने में भिगोना ही नहीं है ज़िन्दगी, रेंग कर मर-मर

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मेरे काम की नहीं

बहुत उम्मीद थी कि लौटते ही ढेर सारे बंद लिफाफे गेट पर लगे बक्से में बेतरतीब पड़े मिलेंगे। स्वीच ऑफ बताता फोन अपनी जद में पहुंचते ही मिसकॉल, अनरीड मेसेज की सूचनाएं

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जीवन वृत्तांत

उठाया ही था पहला कौर कि पगहा तुड़ाकर भैंस भागी कहीं और पहुंचा ही था खेत में पानी कि छप्पर में आग लगी, बिटिया चिल्लानी आरंभ ही किया था गीत का बोल

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प्रायश्चित

इस दुनिया में आने-जाने के लिए अगर एक ही रास्ता होता और नज़र चुराकर बच निकलने के हज़ार रास्ते हम निकाल नहीं पाते तो वही एकमात्र रास्ता हमारा प्रायश्चित होता और ज़िंदगी

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घर से भागी हुई लड़की

परीक्षा में फ़ेल हो जाने पर या माँ-बाप से लड़कर घर से भाग जाता है लड़का दुख व्यक्त करते हैं लोग लड़का कहीं कर लेता है दो रोटी का जुगाड़ या फिर

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एक आदमी के बारे में

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उन्होंने उसके मुँह पर ज़ंजीरें कस दीं मौत की चट्टान से बाँध दिया उसे और कहा — तुम हत्यारे हो उन्होंने उससे भोजन, कपड़े और अण्डे छीन लिए फेंक दिया उसे मृत्यु-कक्ष

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