आहट सी कोई आए तो लगता है

आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो जब शाख़ कोई हाथ लगाते ही चमन में शरमाए लचक जाए तो लगता

More

काठ का सपना

भरी, धुआँती मैली आग जो मन में है और कभी-कभी सुनहली आँच भी देती है। पूरा शनिश्‍चरी रूप। वे एक बालिका के पिता हैं, और वह बालिका एक घर के बरामदे की

More

क्रूरता

धीरे धीरे क्षमाभाव समाप्त हो जाएगा प्रेम की आकांक्षा तो होगी मगर जरूरत न रह जाएगी झर जाएगी पाने की बेचैनी और खो देने की पीड़ा क्रोध अकेला न होगा वह संगठित

More

जीना मुश्किल है कि आसान

जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सर-ए-मिंबर है किस के है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो

More

धर्म संकट

शाम का समय था, हम लोग प्रदेश, देश और विश्‍व की राजनीति पर लंबी चर्चा करने के बाद उस विषय से ऊब चुके थे। चाय बड़े मौके से आई, लेकिन उस ताजगी

More

एक दिन इसी तरह

(वीरेन के लिए) एक दिन इसी तरह किसी फ़ाइल के भीतर या कविता की किताब के पन्नों में दबा तुम्हारा ख़त बरामद होगा मैं उसे देखूँगा, आश्चर्य से, ख़ुशी से खोलूँगा उसे,

More

मोहन राकेश का पत्र राजेंद्र यादव के नाम

डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर 13-5-55 माई डियर राजेन्द्र यादव, दोस्त उपन्यास की पांडुलिपि भेजने में दो दिन की देरी हो ही गई, जो अपनी आदतों को देखते हुए बहुत कम है। ख़ैर, पार्सल

More

आख़िरी दिन की तलाश

ख़ुदा ने क़ुरआन में कहा है कि लोगों मैं ने तुम्हारी ख़ातिर फ़लक बनाया फ़लक को तारों से चाँद सूरज से जगमगाया कि लोगों मैं ने तुम्हारी ख़ातिर ज़मीं बनाई ज़मीं के

More

वे दस मिनट

कोलकाता से चेन्नई के लिए ट्रेन में बैठा था। 24 घंटे का सफर। साथ में दो एक किताबें रख ली थी। नीचे की बर्थ पाकर संतुष्ट था। सामान लगाया और टीटी से

More

कविता क्या है

कविता क्या है हाथ की तरफ़ उठा हुआ हाथ देह की तरफ़ झुकी हुई आत्मा मृत्यु की तरफ़ घूरती हुई आँखें क्या है कविता कोई हमला हमले के बाद पैरों को खोजते

More
1 56 57 58 59 60 68