मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
कवियों को ढूँढो, मेरे दोस्त ने कहा वे उन चीज़ों के बारे में बातें नहीं करेंगे जिनके बारे में तुम और मैं बातें करते हैं वे आर्थिक एकीकरण या वित्तीय चकबंदी की
Moreएक आजकल कानों में आवाज़ें बहुत आती हैं इधर से चीखने, रोने, विलाप करने की, उधर से धमकियाँ, और ग़ालियाँ रंजिश से भरी वहाँ से लूट लो, पकड़ो इसे, अब छोड़ना मत
Moreवहाँ कोई नहीं है धिकते हुए लोहे की तरह लगती हैं अपनी ही सांसें खाँसते हुए अपाढ़ है उठना-बैठना आवाज़ जो रहती थी समय-असमय में तत्पर वह भी काया के भीतर कहीं
More1) किक्की के लिए तुम्हें बढ़ते हुए देखने से ज़्यादा सुखद मेरे लिए और कुछ नहीं परन्तु तुम ऐसे वक़्त में बड़ी हो रही हो मेरी बच्ची जब मानवता की हांफनी छूटी
Moreधन्य यह वसुंधरा! मुख में इतनी सारी नदियों का झाग, केशों में अंधकार! एक अंतहीन प्रसव-पीड़ा में पड़ी हुई पल-पल मनुष्य उगल रही है, नगर फेंक रही है, बिलों से मनुष्य निकल
Moreइतने प्राण, इतने हाथ, इतनी बुद्धि इतना ज्ञान, संस्कृति और अंतःशुद्धि इतना दिव्य, इतना भव्य, इतनी शक्ति यह सौंदर्य, वह वैचित्र्य, ईश्वर-भक्ति इतना काव्य, इतने शब्द, इतने छंद जितना ढोंग, जितना भोग
Moreएक आवाज़ है तुम्हारे अंदर जो तुम्हें पूरे दिन सुनाई देती है मुझे महसूस होता है कि यह सही है मेरे लिए, मगर मैं जानता हूँ कि यह गलत है कोई शिक्षक,
Moreवह मेरा उत्तर, मेरा दक्षिण, मेरा पूर्व और पश्चिम था, मेरा काम करने का सप्ताह और मेरा रविवार का आराम, मेरी दोपहर, मेरी आधी रात, मेरी बात, मेरा गाना; मैंने सोचा था
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