मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
उसे भूलने की लड़ाई लड़ता रहता हूँ यह लड़ाई भी दूसरी कठिन लड़ाइयों जैसी है दुर्गम पथ जाते हैं उस ओर उसके साथ गुजारे दिनों के भीतर से उठती आती है जो
Moreमेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे इस बूढ़े पीपल की छाया में सुस्ताने आएँगे हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेड़ो मत हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आएँगे थोड़ी आँच
Moreतुम कहोगे कि छि: इतनी स्वार्थ-परायणता! पर प्यारे, यह स्वार्थ-परायणता नहीं है, यह सच्चे हृदय का उद्गार है, फफोलों से भरे हृदय का आश्वासन है, व्यथित हृदय की शान्ति है, आकुलता भरे
Moreन जाने हुई बात क्या मन इधर कुछ बदल-सा गया है मुझे अब बहुत पूछने तुम लगी हो उधर नींद थी इन दिनों तुम जगी हो यही बात होगी अगर कुछ न
Moreपटना 09-11-58 मान्यवर जयप्रकाशजी, प्रणाम! मानवीय गुणों पर जोर देते हुए आपने अभी हाल में जो बयान दिया है उसकी कतरन मैंने पास रख ली है और उसे कई बार पढ़ गया
Moreआहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो साया कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो जब शाख़ कोई हाथ लगाते ही चमन में शरमाए लचक जाए तो लगता
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