मैंने पूछा — मुन्ने! तुम क्यूँ अपनी अम्मी जान को बाजी कहते हो मुन्ना बोला बाजी भी तो नानी-जी को आपा आपा कहती हैं इस बाज़ार का जो कोठा है उस की
एक लड़की, उदास लड़की, बला की उदास लड़की! .. जिसके नाज़ुक होंटों से गिर पड़ती है कोई रूमानी नज़्म, बोलते हुए, एक नज़्म , रूमानी नज़्म, बला की रूमानी नज़्म! … जिसकी
Moreतुम मुझे पहन सकते हो कि मैं ने अपने आप को धुले हुए कपड़े की तरह कई दफ़अ’ निचोड़ा है कई दफ़अ’ सुखाया है तुम मुझे चबा सकते हो कि मैं चूसने
Moreइस उम्र के बाद उस को देखा! आँखों में सवाल थे हज़ारों होंटों पे मगर वही तबस्सुम! चेहरे पे लिखी हुई उदासी लहजे में मगर बला का ठहराओ आवाज़ में गूँजती जुदाई
Moreहमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा’दा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं
Moreख़ुदा ने क़ुरआन में कहा है कि लोगों मैं ने तुम्हारी ख़ातिर फ़लक बनाया फ़लक को तारों से चाँद सूरज से जगमगाया कि लोगों मैं ने तुम्हारी ख़ातिर ज़मीं बनाई ज़मीं के
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