जीवन वृत्तांत

उठाया ही था पहला कौर कि पगहा तुड़ाकर भैंस भागी कहीं और पहुंचा ही था खेत में पानी कि छप्पर में आग लगी, बिटिया चिल्लानी आरंभ ही किया था गीत का बोल

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प्रायश्चित

इस दुनिया में आने-जाने के लिए अगर एक ही रास्ता होता और नज़र चुराकर बच निकलने के हज़ार रास्ते हम निकाल नहीं पाते तो वही एकमात्र रास्ता हमारा प्रायश्चित होता और ज़िंदगी

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घर से भागी हुई लड़की

परीक्षा में फ़ेल हो जाने पर या माँ-बाप से लड़कर घर से भाग जाता है लड़का दुख व्यक्त करते हैं लोग लड़का कहीं कर लेता है दो रोटी का जुगाड़ या फिर

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एक आदमी के बारे में

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उन्होंने उसके मुँह पर ज़ंजीरें कस दीं मौत की चट्टान से बाँध दिया उसे और कहा — तुम हत्यारे हो उन्होंने उससे भोजन, कपड़े और अण्डे छीन लिए फेंक दिया उसे मृत्यु-कक्ष

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काली मिट्टी

काली मिट्टी काले घर दिनभर बैठे-ठाले घर काली नदिया काला धन सूख रहे हैं सारे बन काला सूरज काले हाथ झुके हुए हैं सारे माथ काली बहसें काला न्याय खाली मेज पी

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कविता की जरुरत

बहुत कुछ दे सकती है कविता क्यों कि बहुत कुछ हो सकती है कविता ज़िन्दगी में अगर हम जगह दें उसे जैसे फलों को जगह देते हैं पेड़ जैसे तारों को जगह

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एक कम है

अब एक कम है तो एक की आवाज कम है एक का अस्तित्व एक का प्रकाश एक का विरोध एक का उठा हुआ हाथ कम है उसके मौसमों के वसंत कम हैं

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अक्सर एक व्यथा

अक्सर एक गन्ध मेरे पास से गुज़र जाती है, अक्सर एक नदी मेरे सामने भर जाती है, अक्सर एक नाव आकर तट से टकराती है, अक्सर एक लीक दूर पार से बुलाती

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प्रेम के लिए जगह

उसने अपने प्रेम के लिए जगह बनाई। बुहार कर अलग कर दिया तारों को सूर्य-चन्द्रमा को रख दिया एक तरफ वनलताओं को हटाया उसने पृथ्वी को झाड़ा-पोंछा और आकाश की तहें ठीक

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