वे तुम्हें मज़बूर करेंगे

वे तुम्हें मज़बूर करेंगे कि तुम्हारा भी एक रूप हो निश्चित कि तुम्हारा भी हो एक दावा कि हो तुम्हारा भी एक वादा कि तुम्हारा भी एक स्टैण्ड हो कि तुम्हारी भी

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वसीयत

भला राख की ढेरी बनकर क्या होगा ? इससे तो अच्छा है कि जाने के पहले अपना सब कुछ दान कर जाऊँ। अपनी आँखें मैं अपनी स्पेशल के ड्राइवर को दे जाऊँगा। ताकि

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तुम्हारे भीतर

एक स्त्री के कारण तुम्हें मिल गया एक कोना तुम्हारा भी हुआ इंतज़ार एक स्त्री के कारण तुम्हें दिखा आकाश और उसमें उड़ता चिड़ियों का संसार एक स्त्री के कारण तुम बार-बार

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नदी बोली समंदर से

नदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही रुबाई हूँ मुझे ऊँचाइयों का वह अकेलापन नहीं भाया लहर होते हुये भी तो मेरा

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विचार आते हैं

विचार आते हैं लिखते समय नहीं बोझ ढोते वक़्त पीठ पर सिर पर उठाते समय भार परिश्रम करते समय चांद उगता है व पानी में झलमलाने लगता है हृदय के पानी में

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उत्तर आधुनिक आलोचक

जब मैंने भूख को भूख कहा प्यार को प्यार कहा तो उन्हें बुरा लगा जब मैंने पक्षी को पक्षी कहा आकाश को आकाश कहा वृक्ष को वृक्ष और शब्द को शब्द कहा

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राजा ने आदेश दिया

राजा ने आदेश दिया : बोलना बन्द क्योंकि लोग बोलते हैं तो राजा के विरुद्ध बोलते हैं। राजा ने आदेश दिया : लिखना बन्द क्योंकि लोग लिखते हैं तो राजा के विरुद्ध लिखते हैं।

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उपक्रम

बुझी हुई रातों की करवटों में ऊंघते अनमने ढंग से सन्नाटे और अंधेरे में मैंने बो रखी हैं कुछ तस्वीरें कुछ मोह-पाश जो तेज झंझावात में पानी की तरह बह निकलते हैं

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रामदास

चौड़ी सड़क गली पतली थी दिन का समय घनी बदली थी रामदास उस दिन उदास था अंत समय आ गया पास था उसे बता, यह दिया गया था, उसकी हत्या होगी धीरे

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मैं कहीं और भी होता हूँ

मैं कहीं और भी होता हूँ जब कविता लिखता हूँ कुछ भी करते हुए कहीं और भी होना धीरे-धीरे मेरी आदत-सी बन चुकी है हर वक्त बस वहीं होना जहाँ कुछ कर

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