फूलों ने दिए जख़्म तो काँटों से गिला क्या क्या करना था अपनों से सुलूक और किया क्या जब हाथ में शीशा था न सागर था न मीना गर दिल नहीं टूटा
तुम नहीं थे एक ख़ालीपन था गहरे पग-चिह्न लिए दूर तक रेत थी और कुछ भी नहीं था जहाँ मैं थी वहाँ मैं नहीं थी बची हुई नमी लिए लुप्त होती एक
Moreफूलों ने दिए जख़्म तो काँटों से गिला क्या क्या करना था अपनों से सुलूक और किया क्या जब हाथ में शीशा था न सागर था न मीना गर दिल नहीं टूटा
Moreदुनिया से मेरे जाने की बात सामने आ रही है ठंडी सादगी से यह सब इसलिए कि शरीर मेरा थोड़ा हिल गया है मैं तैयार तो क़तई नहीं हूँ अभी मेरी उम्र
Moreउदास लड़कों को फूल नहीं भेजे जाते उन्हें कॉफी पर भी नहीं बुलाया जाता उदास लड़के रोते भी नहीं उनकी प्रेमिकाएँ भी शायद ही होतीं। उदास लड़के अक्सर कर्मठ या निठल्ले हो जाते हैं थकन
Moreवे उतनी ही लड़ाकू थीं जितना कि उनका सेनापति वे अपनी ख़ूबसूरती से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक थीं अपने जूड़े में उन्होंने सरहुल और ईचा बा की जगह साहस का फूल खोंसा था
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