मैं आपसे पहले ही कह चुका हूँ कि मैं लिख नहीं सकता, क्योंकि दिमाग में ख़यालात इतने बारीक आते हैं कि जिनको जाहिर करने के लिए मुझे भाषा नहीं मिलती। आप खुद
Moreपुराने शहर उड़ना चाहते हैं लेकिन पंख उनके डूबते हैं अक्सर खून के कीचड़ में! मैं अभी भी उनके चौराहों पर कभी भाषण देता हूँ जैसा कि मेरा काम रहा वर्षों से
Moreमुझे बचपन से नक़्शे देखने का शौक़ है। आप समझेंगे कि कुछ भूगोल विज्ञान की तरफ़ प्रवृत्ति होगी – नहीं, सो बात नहीं; असल बात यह है कि नक्शों के सहारे दूर-दुनिया
Moreआदमी के चुप रहने का मतलब यह तो नहीं कि उसके भीतर कोई हलचल नहीं है फिर भी उन्हें पसंद है चुप्पा आदमी चुप रहने से बाहर सब कुछ शांत रहता है
Moreएक दिन एक कवि ने शिकायत की कि ‘आप हिंदी के लेखकों को ही क्यों ठोकते हैं? अन्य भाषाओं वाले पढ़ते होंगे, तो क्या सोचते होंगे?’ ‘न ठोकता, तो तुम क्या यह
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