ट्राम में एक याद

चेतना पारीक कैसी हो ? पहले जैसी हो ? कुछ-कुछ खुश कुछ-कुछ उदास कभी देखती तारे कभी देखती घास चेतना पारीक, कैसी दिखती हो ? अब भी कविता लिखती हो ? तुम्हें मेरी याद न होगी

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कुछ बातें

आत्मग्लानि का कोई रंग नहीं होता बेचैनी की कोई भाषा नहीं दुख किसी कैलेंडर में दर्ज नहीं होते सुख को सहेजना धूप में स्वेटर सुखाना है मर्यादा की कोई सीमा नहीं होती

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काव्य गुरु

वे कहते हैं : प्रेम-कविताएँ लिखने के लिए प्रेम-कविताएँ पढ़ो वे यह नहीं कहते : प्रेम करो वे कहते हैं : फूलों तक जाने के लिए ख़ुशबू और रंग ख़रीदो वे यह

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मुझे हल कीजिए

मैं एक समस्या हूँ मुझे हल कीजिए उड़ने की चाह हूँ भटक गई राह हूँ निकल गई आह हूँ हिम्मत की थाह हूँ दुखती हुई रग हूँ थका हुआ पग हूँ ठहर

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इंतज़ार

एक औरत ताउम्र बाट जोहती है कि उसे किसी नाम से पुकारा जाए ऐसे कि नाम के आगे पीछे उग आएँ कई सारे नाम और वह अपना एक नाम भूल जाए। एक

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मंटो की पाँच लघु कथाएँ

घाटे का सौदा दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और बयालीस रुपए देकर उसे ख़रीद लिया. रात गुज़ार कर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा,‘‘तुम्हारा नाम क्या

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पुराने ख़ुदा

मथुरा के एक तरफ़ जमुना है और तीन तरफ़ मंदिर, इस हुदूद–ए–अर्बआ में नाई, हलवाई, पांडे, पुजारी और होटल वाले बस्ते हैं. जमुना अपना रुख़ बदलती रहती है. नए–नए आलीशान मंदिर भी तामीर

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