देह प्रेम के काम आती है वह यातना देने और सहने के काम आती है देह है तो राज्य और धर्म को दंड देने में सुविधा होती है पीटने में जला देने
Moreचेतना पारीक कैसी हो ? पहले जैसी हो ? कुछ-कुछ खुश कुछ-कुछ उदास कभी देखती तारे कभी देखती घास चेतना पारीक, कैसी दिखती हो ? अब भी कविता लिखती हो ? तुम्हें मेरी याद न होगी
Moreवे कहते हैं : प्रेम-कविताएँ लिखने के लिए प्रेम-कविताएँ पढ़ो वे यह नहीं कहते : प्रेम करो वे कहते हैं : फूलों तक जाने के लिए ख़ुशबू और रंग ख़रीदो वे यह
Moreमैं एक समस्या हूँ मुझे हल कीजिए उड़ने की चाह हूँ भटक गई राह हूँ निकल गई आह हूँ हिम्मत की थाह हूँ दुखती हुई रग हूँ थका हुआ पग हूँ ठहर
Moreजो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ है तूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ है जिसने सोने को खोदा लोहा मोड़ा है जो रवि के रथ का घोड़ा है वह
Moreजब से क़रीब हो के चले ज़िंदगी से हम ख़ुद अपने आइने को लगे अजनबी से हम कुछ दूर चल के रास्ते सब एक से लगे मिलने गए किसी से मिल आए
Moreघाटे का सौदा दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और बयालीस रुपए देकर उसे ख़रीद लिया. रात गुज़ार कर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा,‘‘तुम्हारा नाम क्या
Moreमथुरा के एक तरफ़ जमुना है और तीन तरफ़ मंदिर, इस हुदूद–ए–अर्बआ में नाई, हलवाई, पांडे, पुजारी और होटल वाले बस्ते हैं. जमुना अपना रुख़ बदलती रहती है. नए–नए आलीशान मंदिर भी तामीर
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