मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
आए हैं समझाने लोग हैं कितने दीवाने लोग वक़्त पे काम नहीं आते हैं ये जाने-पहचाने लोग जैसे हम इन में पीते हैं लाए हैं पैमाने लोग फ़र्ज़ानों से क्या बन आए
Moreकाजू भुने प्लेट में व्हिस्की गिलास में उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैत इतना असर है खादी के उजले लिबास में आज़ादी का ये जश्न
Moreउनकी कविताओं में शब्द नहीं बोलते उनके बनाए चित्रों में रंग नहीं बहकते उनकी कहानियों में तख़्त-ओ-ताज के लिए ख़ून नहीं बहता फिर भी वे कविता करते हैं चित्र बनाते हैं कहानियाँ
Moreन रवा कहिये न सज़ा कहिये कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क़ इस को हर्गिज़ न बर्मला कहिये वो मुझे क़त्ल कर के कहते हैं मानता
Moreढंगों और दंगों के इस महादेश में ढंग के नाम पर दंगे ही रह गये हैं। और दंगों के नाम पर लाल खून, जो जमने पर काला पड़ जाता है। यह हादसा
Moreजब वह कुछ कहती है उसकी आवाज़ में एक कोई चीज़ मुझे एकाएक औरत की आवाज़ लगती है जो अपमान बड़े होने पर सहेगी वह बड़ी होगी डरी और दुबली रहेगी और
Moreमैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक कविता लिखना चाहता हूँ। चिड़िया नें मुझ से पूछा, ‘तुम्हारे शब्दों में मेरे परों की रंगीनी है?’ मैंने कहा, ‘नहीं’। ‘तुम्हारे शब्दों में मेरे
Moreबात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार बे-क़रारी तुझे ऐ
Moreना निरापद कोई नहीं है न तुम, न मैं, न वे न वे, न मैं, न तुम सबके पीछे बंधी है दुम आसक्ति की! आसक्ति के आनन्द का छंद ऐसा ही है
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