मैक्सीन — एल.डी की पत्नी — जब काम से घर लौटी तो उसने पाया एल.डी किचन टेबल पर अपनी पंद्रह वर्षीय बेटी रे से बहस कर रहा है. बहस करते हुए वह
Moreलिखने से ही लिखी जाती है कविता प्रेम भी करने की ही चीज़ है जैसे जंगल सुनने की किताब डूबने की मृत्यु इंतज़ार की जीवन, अपने को चारों ओर से समेट कर
More1. झाझ और प्रेमिका मन के भीतर आती गयी तुम, जैसे आता है गोंद पेड़ों पर, प्रेम भर जाये तो बरस पड़ता है, शरीर के तनों पर! … तुम आयी! आकाश सकुचाया,
Moreइस ज़माने में जिनका ज़माना है भाई उन्हीं के ज़माने में रहते हैं हम उन्हीं की हैं सहते, उन्हीं की हैं कहते उन्हीं की ख़ातिर दिन-रात बहते हैं हम ये उन्हीं का
More1. किसने तय किया किसी कविता का कविता होना ताल लय छंद से परे किसी के रोने में सौन्दर्य किसी के हंसने में संगीत किसने तय किया ये पहाड़ है, ये नदी
Moreहम सब तो खड़े हैं मक़तल में क्या हमको ख़बर इस बात की है जिस जुल्म को हम सौग़ात कहें सौग़ात वो काली रात की है हम जिसको मसीहा कह बैठे वो
Moreमाँ के मुँह में ही मातृभाषा को क़ैद कर दिया गया और बच्चे उसकी रिहाई की माँग करते-करते बड़े हो गए। मातृभाषा ख़ुद नहीं मरी थी उसे मारा गया था पर, माँ
Moreचंदू, मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटा चंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटा चंदू, मैंने सपना देखा, तुम्हें खोजते बद्री बाबू चंदू, मैंने सपना देखा, खेल-कूद में
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