हर लड़की के तकिए के नीचे तेज़ ब्लेड गोंद की शीशी और कुछ तस्वीरें होती हैं सोने से पहले वो कई तस्वीरों की तराश-ख़राश से एक तस्वीर बनाती है किसी की आँखें
Moreचाहे मुझे इतिहास में निचला दर्जा दो अपने कटु, विकृत झूठ के साथ, भले ही कीचड़ में सान दो फिर भी, धूल की तरह, मैं उठ जाऊँगी मेरी जिंदादिली से परेशान हो
Moreमैं एक अदृश्य दुनिया में, न जाने क्या कुछ कर रहा हूँ। मेरे पास कुछ भी नहीं है- न मेरी कविताएँ हैं, न मेरे पाठक हैं न मेरा अधिकार है यहाँ तक
Moreतेरे आने की जब ख़बर महके तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके शाम महके तेरे तसव्वुर से शाम के बाद फिर सहर महके रात भर सोचता रहा तुझको ज़हन-ओ-दिल मेरे रात भर
More(1) आज मैं अकेला हूँ अकेले रहा नहीं जाता। (2) जीवन मिला है यह रतन मिला है यह धूल में कि फूल में मिला है तो मिला है यह मोल-तोल इसका अकेले
Moreतुमसे अलग होकर लगता है अचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं, और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में गिरता जा रहा हूँ। अब कहीं कोई यात्रा नहीं है, न अर्थमय, न
Moreमैं उनका ही होता जिनसे मैंने रूप भाव पाए हैं। वे मेरे ही हिये बंधे हैं जो मर्यादाएँ लाए हैं। मेरे शब्द, भाव उनके हैं मेरे पैर और पथ मेरा, मेरा अंत
Moreमुझको तब भी यह लगता था कविता ही दुख की बोली है काग़ज़ की नावों के जैसे यद्यपि छोटे-छोटे सुख थे, दुख का भवसागर अपार था लेकिन थी एक जगह घर में
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