मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
वह स्त्री पता नहीं कहाँ होगी जिसने मुझसे कहा था — वे तमाम स्त्रियाँ जो कभी तुम्हें प्यार करेंगी मेरे भीतर से निकल कर आई होंगी और तुम जो प्रेम मुझसे करोगे
More1. घर जितनी शास्त्रीय है यह बात उतनी ही लौकिक घर को जोड़ने वाला श्रम मनुष्य मात्र को ही नहीं पशु – पक्षी और जीवन को धारण किये कीड़े को भी कितना
Moreवो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का उधर लाखों
Moreजब मैं हाईस्कूल में पढ़ता था, तब हमारे अंग्रेज़ी के शिक्षक को कहावतें और सुभाषित रटवाने की बड़ी धुन थी. सैकड़ों अंग्रेज़ी कहावतें उन्होंने हमें रटवाई और उनका विश्वास था की यदि हमने
Moreमत लिखो — अगर फूट के ना निकले बिना किसी वजह के मत लिखो। अगर बिना पूछे-बताए ना बरस पड़े, तुम्हारे दिल और दिमाग़ और जुबाँ और पेट से मत लिखो ।
Moreमेरे बाद वे उन छातियों से भी लगकर रोई होंगी जो मेरी नहीं थीं दूसरे चुंबन भी जगे होंगे उनके होंठों पर दूसरे हाथों ने भी जगाया होगा उनकी हथेलियों को उनकी
Moreसूरज ! सोख न लेना पानी ! तड़प तड़प कर मर जाएगी मन की मीन सयानी ! सूरज, सोख न लेना पानी ! बहती नदिया सारा जीवन साँसें जल की धारा जिस पर तैर रहा नावों-सा
Moreसाधो ये मुरदों का गाँव पीर मरे पैगम्बर मरिहैं मरि हैं जिन्दा जोगी राजा मरिहैं परजा मरिहैं मरिहैं बैद और रोगी चंदा मरिहैं सूरज मरिहैं मरिहैं धरणि आकासा चौदां भुवन के चौधरी
Moreक्या तुम कविता की तरफ़ जा रहे हो ? नहीं, मैं दीवार की तरफ़ जा रहा हूँ । फिर तुमने अपने घुटने और अपनी हथेलियाँ यहाँ क्यों छोड़ दी हैं ? क्या तुम्हें चाकुओं
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