बच्चन — आदमी और कवि

देह के बच्चन, मन के बच्चन, समाज के बच्चन, सभ्यता और संस्कृति के बच्चन, सरकार के बच्चन, जनता के बच्चन और काव्य के बच्चन, ये सब बच्चन मुझे एक जैसे ही लगे

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क्या भूलूँ क्या याद करूँ

मेरी विगत स्मृतियों, मेरे पूर्व इतिहास, मेरे वर्तमान के श्रम-संघर्ष को जैसा उसने जाना था, जैसी मेरी स्थिति की निकट भविष्य में, कम से कम अपने जीवन-काल में उसने कल्पना की थी,

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