जहाँ तुम नहीं थे

तुम नहीं थे एक ख़ालीपन था गहरे पग-चिह्न लिए दूर तक रेत थी और कुछ भी नहीं था जहाँ मैं थी वहाँ मैं नहीं थी बची हुई नमी लिए लुप्त होती एक

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समय की नदी

हम समय की नदी तैर कर आ गए अब खड़े हैं जहाँ वह जगह कौन है? तोड़ते-जोड़ते हर नियम, उपनियम उत्सवों के जिए साँस-दर-साँस हम एक पूरी सदी तैर कर आ गए

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