अपनी मंज़िल से जा लगा कोई

अपनी मंज़िल से जा लगा कोई अब न देखेगा रास्ता कोई सूनी–सूनी सी रहगुज़र क्यूँ है आज गुज़रा न क़ाफ़िला कोई आज पत्थर उदास बैठे हैं आज टूटा है आइना कोई ख़ुशबूऐं आ

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कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया

कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्ख़ी-ए-हालात ने दिल तोड़ दिया हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया

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