वसीयत

भला राख की ढेरी बनकर क्या होगा ? इससे तो अच्छा है कि जाने के पहले अपना सब कुछ दान कर जाऊँ। अपनी आँखें मैं अपनी स्पेशल के ड्राइवर को दे जाऊँगा। ताकि

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प्रतीक्षा

प्रतीक्षा धूप में चिड़ियों का स्पन्दन है, हरी पत्तियों का नीरव उजला गान है, प्रतीक्षा दरवाजे पर दस्तक के अनसुने रहने पर छोड़े गए शब्द हैं

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कविता क्या है

कविता क्या है हाथ की तरफ़ उठा हुआ हाथ देह की तरफ़ झुकी हुई आत्मा मृत्यु की तरफ़ घूरती हुई आँखें क्या है कविता कोई हमला हमले के बाद पैरों को खोजते

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कितना अच्छा होता है

एक-दूसरे को बिना जाने पास-पास होना और उस संगीत को सुनना जो धमनियों में बजता है, उन रंगों में नहा जाना जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं। शब्दों की खोज शुरु होते ही

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