उम्मीद पंखों वाली वो शय है, जो आत्मा में बसती है, बिना किसी शब्द के गीत गाती है और कभी नहीं रूकती और सबसे मधुर है इसे आंधियों में सुनना जहाँ दुखदाई
Moreआँखें तो देख ही लेती हैं औपचारिकता में छुपी हिंसा को, बेरुखी का हल्का से हल्का रंग पकड़ लेती है आँख फिर भी बैठे रहना पड़ता है खिसियानी मुस्की लिए, छल-कपट ईर्ष्या
Moreमन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥ जो सुख पाऊँ राम भजन में सो सुख नाहिं अमीरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में॥ भला बुरा सब का सुनलीजै कर गुजरान गरीबी में
Moreहमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी हमनी के साहेब से मिनती सुनाइबि। हमनी के दुख भगवानओं न देखता ते, हमनी के कबले कलेसवा उठाइबि। पदरी सहेब के कचहरी में जाइबिजां, बेधरम
Moreडायरी लिखना एक कवि के लिए सबसे मुश्किल काम है। कवि जब भी अपने समय के बारे में डायरी लिखना शुरू करता है अरबी कवि समीह-अल-कासिम की तरह लिखने लगता है कि
Moreप्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है जिस्म की बात नहीं थी उन के दिल तक जाना था लम्बी दूरी
Moreयह स्त्री सब कुछ जानती है पिंजरे के बारे में जाल के बारे में यंत्रणागृहों के बारे में। उससे पूछो पिंजरे के बारे में पूछो वह बताती है नीले अनन्त विस्तार में
Moreवो आदमी उसका पीछा कर रहे थे। इतनी बुलंदी से वो दोनों नीचे सपाट खेतों में चलते हुए दो छोटे से खिलौनों की तरह नज़र आ रहे थे। दोनों के कंधों पर
Moreखेलते हुए अन्य बच्चों के साथ अपने साथ हो रहे खेड़ी का विरोध कर रहा है मेरा बेटा चिल्ला-चिल्लाकर काफ़ी कर्कश लग रही है आवाज़ उसकी बार-बार जाने को होता हूँ तैयार
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