मैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के खिलाफ़ एक सख्त कार्यवाही है उस औरत की बगल में लेटकर मुझे लगा कि नफ़रत और मोमबत्तियाँ जहाँ बेकार साबित हो
उसे भूलने की लड़ाई लड़ता रहता हूँ यह लड़ाई भी दूसरी कठिन लड़ाइयों जैसी है दुर्गम पथ जाते हैं उस ओर उसके साथ गुजारे दिनों के भीतर से उठती आती है जो
Moreन जाने हुई बात क्या मन इधर कुछ बदल-सा गया है मुझे अब बहुत पूछने तुम लगी हो उधर नींद थी इन दिनों तुम जगी हो यही बात होगी अगर कुछ न
More(वीरेन के लिए) एक दिन इसी तरह किसी फ़ाइल के भीतर या कविता की किताब के पन्नों में दबा तुम्हारा ख़त बरामद होगा मैं उसे देखूँगा, आश्चर्य से, ख़ुशी से खोलूँगा उसे,
Moreकविता क्या है हाथ की तरफ़ उठा हुआ हाथ देह की तरफ़ झुकी हुई आत्मा मृत्यु की तरफ़ घूरती हुई आँखें क्या है कविता कोई हमला हमले के बाद पैरों को खोजते
Moreपुराने शहर उड़ना चाहते हैं लेकिन पंख उनके डूबते हैं अक्सर खून के कीचड़ में! मैं अभी भी उनके चौराहों पर कभी भाषण देता हूँ जैसा कि मेरा काम रहा वर्षों से
More