प्रेम के लिए जगह

उसने अपने प्रेम के लिए जगह बनाई। बुहार कर अलग कर दिया तारों को सूर्य-चन्द्रमा को रख दिया एक तरफ वनलताओं को हटाया उसने पृथ्वी को झाड़ा-पोंछा और आकाश की तहें ठीक

More

शून्य

भीतर जो शून्य है उसका एक जबड़ा है जबड़े में मांस काट खाने के दाँत हैं; उनको खा जाएँगे, तुमको खा जाएँगे। भीतर का आदतन क्रोधी अभाव वह हमारा स्वभाव है, जबड़े

More

घर

जहाँ बिल्ली को खदेड़ता दिख जाएगा खरगोश वहीं अपना घर बनाऊँगा वहीं शीत वसंत लाऊँगा वहीं लगाऊँगा सेब, नारंगी संतरा वहीं कामधेनु पोसूँगा वहीं कवियों, बुलाऊँगा तुम्हें और काव्य पाठ कराऊँगा जहाँ

More

पिता का चश्मा

बुढ़ापे के समय पिता के चश्मे एक-एक कर बेकार होते गए आँख के कई डॉक्टरों को दिखाया विशेषज्ञों के पास गए अन्त में सबने कहा — आपकी आँखों का अब कोई इलाज

More

हमारी उम्र का कपास

हमारी गेंदें अब लुढ़कती नहीं चौकोर हो गई हैं, खिलौने हमारे हाथों में आने से कतराते हैं, धींगा-मस्ती, हो-हुल्लड़ याद नहीं हमने कभी किया हो पैदाइश से ही इतने समझदार थे हम

More

तीसरा रास्ता

मगध में शोर है कि मगध में शासक नहीं रहे जो थे वे मदिरा, प्रमाद और आलस्य के कारण इस लायक नहीं रहे कि उन्हें हम मगध का शासक कह सकें लगभग

More

उसने मेरे बेगानेपन को ही

उसने मेरे बेगानेपन को ही छेड़ दिया घनी उमस में कभी न उसने पंखा हाँका है लसिया गए भात को देसी घी से छौंका है दूध मुँहे पाड़े को माँ से दूर

More

कुंठा

मेरी कुंठा रेशम के कीड़ों-सी ताने-बाने बुनती, तड़प तड़पकर बाहर आने को सिर धुनती, स्वर से शब्दों से भावों से औ’ वीणा से कहती-सुनती, गर्भवती है मेरी कुंठा – कुँवारी कुंती! बाहर

More

तुम्हारा भगवान

तुम्हारे मान लेने से पत्थर भगवान हो जाता है, लेकिन तुम्हारे मान लेने से पत्थर पैसा नहीं हो जाता। तुम्हारा भगवान पत्ते की गाय है, जिससे तुम खेल तो सकते हो, लेकिन

More

उत्तर

बहुत अधिक, बहुत अधिक तुम्‍हें याद करता मैं रहा; यह भी था कारण जो पत्र मैं लिख नहीं सका; लिख नहीं सका, बस। भावों का भार उन शब्‍दों से उठ नहीं सका,

More
1 28 29 30 31 32 35